दिल्ली की सबसे ऊंची इमारत में आशियाने का सपना टूटा? चमचमाते फ्लैट्स और मेट्रो कनेक्टिविटी फिर भी खरीदार लापता!
दिल्ली की सबसे ऊंची 48 मंजिला इमारत और मेट्रो कनेक्टिविटी के बावजूद महंगे फ्लैटों के कारण 20 प्रतिशत बुकिंग भी नहीं हो सकी।

पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की निर्माणाधीन गगनचुंबी आवासीय इमारतें, जो ट्रांजिट ओरिएंटेड डिवेलपमेंट (टीओडी) परियोजना का हिस्सा हैं।
नई दिल्ली: देश की राजधानी में आधुनिक शहरी नियोजन की मिसाल पेश करने वाली दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की पहली महत्वाकांक्षी परियोजना इस समय गंभीर संकट से जूझ रही है। दिल्ली की सबसे ऊंची आवासीय इमारत और बेहतरीन मेट्रो कनेक्टिविटी का दावा करने वाली ट्रांजिट ओरिएंटेड डिवेलपमेंट (टीओडी) योजना के तहत बने पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा प्रोजेक्ट को उम्मीद से बेहद कम रिस्पॉन्स मिला है। सरकारी दावों और तमाम आधुनिक सुविधाओं के विज्ञापनों के बावजूद इस आवासीय परियोजना में अब तक बीस प्रतिशत फ्लैट्स की बुकिंग भी नहीं हो पाई है। खरीदारों की इसी बेरुखी को देखते हुए प्राधिकरण को मजबूरन अपनी इस विशेष योजना में आवेदन करने की अंतिम तिथि को बढ़ाना पड़ा है, जो कि इस बुकिंग सत्र में लगातार दूसरी बार किया गया प्रशासनिक बदलाव है।
शहरी विकास के विशेषज्ञों के अनुसार इस महापरियोजना के पिछड़ने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण काम कर रहे हैं। इस योजना के तहत लाए गए फ्लैटों की बाजार कीमत आम और मध्यम वर्गीय खरीदारों के बजट से काफी ज्यादा होना इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, इस कड़कड़डूमा हाउसिंग स्कीम के तहत वर्तमान में केवल कुछ चुनिंदा दो बीएचके (2 BHK) फ्लैट्स को ही बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है, जिससे खरीदारों के सामने विकल्पों की भारी कमी हो गई है। स्थानीय रियल एस्टेट बाजार के जानकारों और प्रॉपर्टी निवेशकों का मानना है कि भौगोलिक और सामाजिक दृष्टिकोण से पूर्वी दिल्ली के इस क्षेत्र को राजधानी के अन्य कोनों की तुलना में थोड़ा पिछड़ा माना जाता रहा है, जिसके कारण लोग इतनी बड़ी पूंजी यहां फंसाने से कतरा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर पश्चिमी एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और आर्थिक अनिश्चितता के इस दौर ने भी घरेलू निवेशकों को बड़े वित्तीय निवेश करने से रोक रखा है।
प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर देखें तो ट्रांजिट ओरिएंटेड डिवेलपमेंट यानी टीओडी नीति दिल्ली विकास प्राधिकरण की एक बेहद आधुनिक और दूरगामी शहरी विकास योजना है। इस नीति का मुख्य ढांचा दिल्ली मेट्रो और रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) स्टेशनों के आसपास के पांच सौ मीटर के दायरे में मिश्रित उपयोग वाले केंद्रों को विकसित करना है। इस योजना का मुख्य विजन यह था कि लोगों को उनके रहने का आवास, व्यावसायिक दुकानें और कार्यालय की जगह एक ही एकीकृत परिसर में मिल सके जिससे यात्रा का समय और प्रदूषण कम हो। इसके लिए कड़कड़डूमा सहित दिल्ली के प्रमुख मेट्रो कॉरिडोर के पास कुल चौदह बड़े भूखंडों की पहचान की गई थी, जिनमें रोहिणी, द्वारका और पीरागढ़ी जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं।
लगभग तीस हेक्टेयर के विशाल भूभाग पर फैला कड़कड़डूमा का यह 'ईस्ट दिल्ली हब' इस पूरी नीति की पहली और सबसे बड़ी प्रयोगशाला है। इस विशाल प्रोजेक्ट में दिल्ली की सबसे ऊंची यानी एक सौ पचपन मीटर लंबी और अड़तालीस मंजिला आवासीय इमारत का निर्माण किया गया है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। प्राधिकरण को उम्मीद थी कि इस योजना की सफलता के बाद दिलशाद गार्डन, प्रीत विहार, झिलमिल और मंडावली-फजलपुर जैसे आसपास के क्षेत्रों को भी इस आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का सीधा लाभ मिल सकेगा। हालांकि, धरातल पर संपत्तियों की अत्यधिक कीमतों और बाजार की सुस्ती ने फिलहाल इस योजना की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है, जिससे डीडीए के वित्तीय और ढांचागत लक्ष्यों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
