आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा को उनके एल्बम 'मेडिटेशन्स' के लिए मिला पहला ग्रैमी पुरस्कार, सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान ने धर्मशाला आवास पर जाकर सौंपा।

Dalai Lama Grammy Award 2026 : हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में बसे धर्मशाला से आज एक ऐतिहासिक और वैश्विक स्तर पर गौरवपूर्ण तस्वीर सामने आई है। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु, 14वें दलाई लामा को उनके आधिकारिक आवास पर आयोजित एक विशेष और गरिमामयी समारोह में उनकी पहली ग्रैमी ट्रॉफी औपचारिक रूप से सौंप दी गई। संगीत की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान को लेकर स्वयं ऑस्कर और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता की दहलीज पर पहुंचे थे विश्व प्रसिद्ध सरोद वादक उस्ताद अमलाद अली खान, उनके सुपुत्र अमान अली बंगश, अयान अली बंगश और जाने-माने संगीत निर्माता कबीर सहगल। यह पल न केवल कला और आध्यात्मिकता के मिलन का प्रतीक बना, बल्कि इसने वैश्विक पटल पर शांति और करुणा के भारतीय संदेश को एक बार फिर अमर कर दिया।

यह ऐतिहासिक सम्मान दलाई लामा के साल 2025 में आए बहुचर्चित स्पोकन-वर्ड (बोलचाल) एल्बम 'मेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा' के लिए दिया गया है। इस एल्बम ने बीती 1 फरवरी 2026 को लॉस एंजिल्स में आयोजित 68वें ग्रैमी अवार्ड्स में 'बेस्ट ऑडियोबुक, नरेशन एंड स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग' की श्रेणी में जीत हासिल की थी। उस समय अमेरिका में हुए मुख्य समारोह में दलाई लामा की अनुपस्थिति के कारण उनके साथी संगीतकार रूफस वेनराइट ने पुरस्कार स्वीकार किया था, लेकिन आज यह सुनहरी ट्रॉफी सीधे 90 वर्षीय आध्यात्मिक गुरु के हाथों में सुशोभित हुई।


एल्बम की गहराई और उसकी बनावट किसी भी सामान्य संगीत प्रयास से कोसों आगे है। इसमें दलाई लामा के सात दशकों के सार्वजनिक जीवन के अनुभवों, लगभग 100 घंटों से अधिक के भाषणों और संवादों को संकलित कर 10 विशेष ट्रैकों में पिरोया गया है। इस एल्बम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें दलाई लामा के करुणा, पर्यावरण चेतना और वैश्विक शांति से जुड़े विचारों के पीछे उस्ताद अमजद अली खान और उनके बेटों के सरोद की मधुर प्रस्तुतियां बैकग्राउंड म्यूजिक के रूप में बहती हैं। एल्बम के 'वॉटर' नामक ट्रैक में वे तिब्बत में अपने बचपन से लेकर अब तक बदलते पर्यावरण पर चिंता व्यक्त करते हैं, वहीं 'पीस' ट्रैक में वे करुणा को मानव अस्तित्व के लिए अनिवार्य बताते हैं।

प्रतिस्पर्धा के लिहाज से यह जीत बेहद असाधारण रही। 68वें ग्रैमी पुरस्कारों की इस दौड़ में दलाई लामा का मुकाबला दुनिया की कई दिग्गज हस्तियों से था। उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन की संस्मरण पुस्तक 'लवली वन', मशहूर कॉमेडियन और पूर्व ग्रैमी होस्ट ट्रेवर नोह की 'इंटो द अनकट ग्रास' और मिली वानीली के फैब मोरवन जैसी वैश्विक शख्सियतों को पछाड़कर यह मुकाम हासिल किया।

पुरस्कार सौंपने से पहले मीडिया से मुखातिब होते हुए सरोद उस्ताद अमजद अली खान ने बेहद भावुक स्वर में कहा कि यह परियोजना हमारे सरोद की गूंज और महामहिम के कालजयी विचारों का एक पवित्र संगम थी। उनके शब्दों ने दुनिया भर के करोड़ों दिलों को छुआ है और उन्हें यह ग्रैमी सौंपना हमारे परिवार के लिए परम सौभाग्य की बात है। वहीं, ट्रॉफी ग्रहण करते हुए महामहिम दलाई लामा ने अपने चिरपरिचित विनम्र अंदाज में इस सम्मान को किसी व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय वैश्विक जिम्मेदारी की स्वीकृति बताया। उन्होंने संदेश दिया कि आज के दौर में दुनिया की 8 अरब आबादी के कल्याण के लिए शांति, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय एकता की समझ ही एकमात्र रास्ता है। धर्मशाला के इस पावन कक्ष से निकली यह ग्रैमी ट्रॉफी मात्र एक पुरस्कार नहीं, बल्कि अशांत होती जा रही दुनिया के लिए करुणा की एक नई थेरेपी बनकर उभरी है।


Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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