मुंबई में मीठी नदी की बाढ़ में खराब हुई शराब, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 1.2 करोड़ रुपये देने का दिया आदेश|
consumer-commission-order-liquor-stock-compensation-mumbai दक्षिण मुंबई के उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को बाढ़ में नष्ट हुए शराब के स्टॉक के लिए 9 प्रतिशत ब्याज के साथ 1.2 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया। Consumer Commission Orders Compensation for Flood-Damaged Liquor in Mumbai

शराब विक्रेता को मुआवजा देने के मामले में अदालत का फैसला और शराब की बोतलें दिखाई दे रही हैं।
मुंबई: दक्षिण मुंबई के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक शराब विक्रेता कंपनी के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 1.2 करोड़ रुपये का मुआवजा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का निर्देश दिया है। आयोग ने माना कि बाढ़ के कारण खराब हुए शराब के स्टॉक का बीमा दावा खारिज करना बीमा कंपनी का मनमाना और अनुचित निर्णय था।
मामला कुर्ला स्थित एक शराब व्यवसाय से जुड़ी कंपनी का है। कंपनी ने आयोग को बताया कि 29 अगस्त 2017 को मुंबई में हुई भारी बारिश के दौरान उसका गोदाम जलमग्न हो गया था। मीठी नदी के बाढ़ के पानी और दलदली कीचड़ के संपर्क में आने से बड़ी मात्रा में शराब की बोतलें और डिब्बे क्षतिग्रस्त हो गए। पानी के कारण बोतलों के ढक्कनों में जंग लग गई, लेबल खराब हो गए और पूरा स्टॉक बिक्री के लिए अनुपयुक्त हो गया।
राज्य आबकारी विभाग ने निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि शराब का स्टॉक मीठी नदी के बाढ़ के पानी में डूब गया था और मानव उपभोग के लिए सुरक्षित नहीं रहा। विभाग की निगरानी में इस स्टॉक को नष्ट भी कराया गया। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने मुआवजे के दावे को अस्वीकार कर दिया। कंपनी का तर्क था कि शराब के सेवन योग्य न होने संबंधी फॉरेंसिक रिपोर्ट और वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार इस मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट अनिवार्य नहीं थी। साथ ही, आबकारी विभाग की रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध दस्तावेज यह साबित करने के लिए पर्याप्त थे कि बाढ़ के कारण शराब का स्टॉक बिक्री योग्य नहीं रहा। आयोग ने यह भी कहा कि बीमा कंपनी ने अपने सर्वेक्षक की रिपोर्ट में मुआवजे की सिफारिश को भी नजरअंदाज किया, जो उचित नहीं था।
इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने बीमा कंपनी को शराब विक्रेता कंपनी को 1.2 करोड़ रुपये का मुआवजा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए 1 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 25 हजार रुपये अलग से देने का भी निर्देश दिया गया।
यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां प्राकृतिक आपदा के कारण हुए नुकसान के बाद बीमा दावों के निपटारे को लेकर विवाद उत्पन्न होते हैं। आयोग ने अपने आदेश में उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड और आबकारी विभाग की रिपोर्ट को महत्वपूर्ण आधार मानते हुए बीमा कंपनी के दावे को खारिज करने के निर्णय को अनुचित बताया।

Lalita Rajput
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