किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तब दिखाई देती है, जब उसकी बेटियां शिक्षा के माध्यम से अपने सपनों को आकार देने लगती हैं। एक दशक पहले इंदौर के वरिष्ठ नागरिकों द्वारा शुरू की गई एक छोटी-सी पहल आज हजारों बेटियों और जरूरतमंद बच्चों के जीवन में उम्मीद, आत्मविश्वास और अवसर का पर्याय बन चुकी है। आनंदम सीनियर सिटीजन सेंटर का ‘विद्या’ गर्ल्स स्कॉलरशिप प्रोग्राम अपने सफलतम 10 वर्ष पूर्ण कर चुका है और इस अवसर को एक नई सामाजिक पहल के साथ यादगार बनाया गया।

वर्ष 2016 में शुरू हुआ ‘विद्या’ गर्ल्स स्कॉलरशिप प्रोग्राम उन बेटियों के लिए संबल बनकर उभरा, जिनके सपने बड़े थे लेकिन संसाधन सीमित थे। पिछले दस वर्षों में यह अभियान शिक्षा के माध्यम से हजारों छात्राओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता रहा है। समय के साथ इस पहल का दायरा भी बढ़ा और स्कॉलरशिप के साथ आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विद्यालयों में कंप्यूटर वितरण जैसे कार्यक्रम भी इससे जुड़े।

20 जून 2026 को ‘विद्या’ की दस वर्षीय यात्रा का उत्सव बड़े उत्साह और आत्मीयता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शिक्षा सहयोग की नई कड़ी जोड़ते हुए आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों में रहने वाले 2,500 छात्र-छात्राओं को 10,000 नोटबुक्स वितरित की गईं। यह पहल केवल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन बच्चों तक यह संदेश भी पहुंचाने का माध्यम बनी कि समाज उनके सपनों और संघर्षों के साथ खड़ा है।

इस अभियान को सफल बनाने में मुंबई स्थित डिडवानिया (रतनलाल) चैरिटेबल ट्रस्ट का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ट्रस्ट ने 2 लाख रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की, जिसके माध्यम से 10,000 नोटबुक्स जरूरतमंद छात्राओं और विद्यार्थियों तक पहुंचाई जा सकीं।

आनंदम सीनियर सिटीजन सेंटर की विशेषता यह है कि वरिष्ठ नागरिकों पर केंद्रित होने के बावजूद इसके सदस्य समाज के वंचित और जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए लगातार सक्रिय हैं। जिन हाथों ने कभी अपने बच्चों का भविष्य गढ़ा, वही हाथ आज हजारों अनजान बेटियों और बच्चों के सपनों को सहारा देने का कार्य कर रहे हैं। यही संवेदनशीलता और सामाजिक प्रतिबद्धता ‘विद्या’ की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।

आनंदम सीनियर सिटीजन सेंटर के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने कहा कि ‘विद्या’ की 10 वर्षों की यात्रा संस्था के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि इस पहल ने यह विश्वास मजबूत किया है कि छोटी-सी मदद भी किसी बच्चे के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में अनेक बेटियों की सफलता में ‘विद्या’ का योगदान देखकर संतोष होता है और यह अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने सभी दानदाताओं, सहयोगियों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस यात्रा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संस्था के सचिव एस.बी. खंडेलवाल ने कहा कि ‘विद्या’ केवल एक स्कॉलरशिप प्रोग्राम नहीं, बल्कि उन बेटियों के सपनों को सहारा देने का माध्यम है, जिनकी मंजिलें बड़ी हैं। उन्होंने बताया कि 10,000 नोटबुक्स का वितरण भी इसी सोच का विस्तार है, जिससे शिक्षा के माध्यम से बच्चों के सपनों को नई दिशा मिल सके।

दस वर्षों की इस यात्रा का उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन हजारों मुस्कानों, सफलताओं और सपनों का सम्मान था जिन्हें ‘विद्या’ ने संजोया है। यह उन बेटियों के संघर्ष और संकल्प को सलाम करने का अवसर भी था, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा का दामन नहीं छोड़ा। एक दशक पहले प्रज्ज्वलित हुई शिक्षा की यह लौ आज और अधिक प्रकाश के साथ समाज को रोशन कर रही है तथा यह सिद्ध कर रही है कि समर्पण, संवेदना और सामूहिक प्रयास से बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

Pratahkal Bureau

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