हरियाणा की पावन धरा पर जब भी पशु मेलों का आयोजन होता है, तो देश भर की निगाहें वहां के दमखम और नस्ल पर टिक जाती हैं। लेकिन इस बार का नजारा कुछ अलग और बेहद खास था। हरियाणा के एक प्रतिष्ठित मेले में एक ऐसे जीव ने कदम रखा जिसने वहां मौजूद हजारों लोगों की धड़कनें तेज कर दीं। यह कोई वीआईपी नेता या अभिनेता नहीं, बल्कि मारवाड़ी नस्ल का एक नायाब घोड़ा है, जिसका नाम 'काका' रखा गया है। 'काका' की चर्चा केवल उसकी सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि उसकी उस अविश्वसनीय कीमत के लिए हो रही है जिसने बाजार के सभी समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है। 5 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत वाले इस घोड़े ने मेले की रौनक में चार चांद लगा दिए हैं।

इस भव्य आयोजन की मुख्य घटना तब शुरू हुई जब घोड़े के मालिक, सतप्रकाश सांगवान ने 'काका' को प्रदर्शन के लिए मैदान में उतारा। काले चमकदार रंग और ऊंचे कद वाले इस घोड़े को देखते ही खरीदारों और दर्शकों का तांता लग गया। सतप्रकाश सांगवान ने गर्व से बताया कि 'काका' की खुराक और देखभाल पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसकी डाइट में बादाम, देसी घी, दूध और चने जैसी पौष्टिक चीजें शामिल हैं। मेले में मौजूद विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों, जिनमें डॉ. आर.के. सिंह का नाम प्रमुख है, ने भी इस घोड़े की शारीरिक संरचना और इसकी शुद्ध मारवाड़ी नस्ल की जमकर सराहना की है।

घटना के आधिकारिक और प्रबंधकीय पहलुओं की बात करें तो मेले के आयोजक समिति के अध्यक्ष कुलदीप धनखड़ ने पुष्टि की है कि इस बार के मेले में 'काका' सबसे मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा है। प्रशासन ने इस बेशकीमती घोड़े की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए थे, क्योंकि इसकी कीमत ने इसे असाधारण श्रेणी में ला खड़ा किया है। राजस्थान और पंजाब से आए कई बड़े कारोबारियों ने 'काका' को खरीदने के लिए करोड़ों की बोलियां लगाईं, लेकिन सतप्रकाश सांगवान ने स्पष्ट कर दिया कि 'काका' उनके लिए केवल एक पशु नहीं बल्कि परिवार का हिस्सा है और वे इसे किसी भी कीमत पर बेचने के लिए तैयार नहीं हैं।

पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी राजबीर सिंह के अनुसार, ऐसे मेलों का उद्देश्य उत्तम नस्ल के पशुओं का संरक्षण और प्रदर्शन करना होता है। 'काका' जैसे घोड़े न केवल अपनी नस्ल का गौरव बढ़ाते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन के प्रति युवाओं के आकर्षण को भी पुनर्जीवित करते हैं। इस मेले में हरियाणा के कृषि मंत्री ने भी शिरकत की और पशुपालकों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार ऐसे उच्च नस्ल के पशुओं के लिए विशेष बीमा और प्रोत्साहन योजनाएं लागू करने पर विचार कर रही है ताकि सांगवान जैसे उत्साही पशुपालकों को संबल मिल सके।

निष्कर्षतः, हरियाणा के इस मेले में 'काका' की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया है कि आज के आधुनिक युग में भी भारतीय नस्ल के पशुओं का क्रेज कम नहीं हुआ है। 5 करोड़ की कीमत सुनने में भले ही चौंकाने वाली लगे, लेकिन यह उस मेहनत, परंपरा और जुनून का प्रतीक है जिसे हरियाणा के किसान और पशुपालक पीढ़ियों से संजोए हुए हैं। 'काका' की एक झलक पाने के लिए उमड़ी भीड़ और उस पर लगने वाली बोलियां इस बात की गवाह हैं कि यह घोड़ा आने वाले कई वर्षों तक पशु मेलों के इतिहास में एक मिसाल बनकर याद किया जाएगा।

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