केंद्र सरकार के आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। आयोग के नवीनतम टर्म्स ऑफ रेफरेंस (Terms of Reference) में करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स को दायरे से बाहर रखे जाने के बाद विवाद गहराता जा रहा है। इस फैसले के विरोध में ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर इस निर्णय को संशोधित करने की मांग की है। फेडरेशन ने कहा है कि सरकार को पेंशनर्स को आयोग के अंतर्गत शामिल कर 1 जनवरी 2026 से नई वेतन और पेंशन संरचना लागू करनी चाहिए।

फेडरेशन ने अपने पत्र में इस फैसले को “अनुचित और असंवेदनशील” बताया है, यह कहते हुए कि जिन्होंने दशकों तक देश की सेवा की, उन्हें जीवन के अंतिम पड़ाव में उपेक्षित नहीं किया जा सकता। संगठन का कहना है कि 7वें वेतन आयोग में पेंशन संशोधन का प्रावधान स्पष्ट रूप से शामिल था, लेकिन 8वें आयोग की शर्तों से इसे हटा दिया गया है। इससे रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन में संभावित बढ़ोतरी रुक सकती है।

AIDEF ने सरकार के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी हैं — पेंशनर्स को आयोग के दायरे में शामिल करना, नई पेंशन संरचना को 2026 से लागू करना, कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 11 साल करना और हर पांच वर्ष में पेंशन में 5% वृद्धि सुनिश्चित करना। संगठन ने कहा कि संसद की स्थायी समिति ने भी पेंशन में नियमित वृद्धि का सुझाव दिया था, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक राहत मिल सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन आयोग की सिफारिशें तभी प्रभावी होंगी जब महंगाई के आंकड़े वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित करें। वर्तमान में हाउसिंग इंफ्लेशन सरकारी मकानों के किराए और लाइसेंस फीस पर आधारित है, जो बाजार दरों से मेल नहीं खाता। 2017 में 7वें वेतन आयोग द्वारा हाउस रेंट अलाउंस (HRA) बढ़ाने के बाद हाउसिंग इंफ्लेशन 4.7% से बढ़कर 8.45% तक पहुंच गया था, जबकि वास्तविक किराए में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वां वेतन आयोग अगले 18 महीनों में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। आयोग की सिफारिशें केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्तों और पेंशन संरचना को निर्धारित करेंगी।

हालांकि, कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि यदि सरकार ने पेंशनर्स से संबंधित प्रावधानों को संशोधित नहीं किया, तो यह आयोग अपने उद्देश्य से भटक सकता है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यह निर्णय देशभर में असंतोष की लहर पैदा कर सकता है और सरकार को जल्द स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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