जोजिला टनल परियोजना में भारत ने ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए 13.153 किमी लंबी सुरंग के अंतिम चट्टानी अवरोध को तोड़ दिया है। दुनिया की सबसे लंबी हाई-एल्टीट्यूड सिंगल-ट्यूब द्वि-दिशात्मक रोड टनल बनने जा रही यह परियोजना कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर कनेक्टिविटी, तेज यात्रा, बेहतर पर्यटन और मजबूत सामरिक पहुंच सुनिश्चित करेगी।

भारत ने 9 जून 2026 को बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब जोजिला टनल के भीतर मौजूद अंतिम चट्टानी अवरोध को सफलतापूर्वक तोड़ दिया गया। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ 13.153 किलोमीटर लंबी जोजिला टनल के उत्खनन कार्य का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण पूरा हो गया। यह सुरंग दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब द्वि-दिशात्मक सड़क सुरंग बनने जा रही है, जो इतनी ऊंचाई पर निर्मित होने वाली अपनी तरह की सबसे बड़ी परियोजना मानी जा रही है।

यह ऐतिहासिक क्षण तब आया जब बालटाल और मीनामार्ग दोनों सिरों से काम कर रही सुरंग निर्माण टीमों ने भूमिगत स्तर पर एक-दूसरे तक सफलतापूर्वक पहुंच बनाते हुए सुरंग को जोड़ दिया। वर्षों की कठिन मेहनत, अत्याधुनिक इंजीनियरिंग और प्रतिकूल हिमालयी परिस्थितियों के बीच हासिल की गई यह सफलता भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है।

जोजिला टनल पश्चिमी हिमालय में स्थित जोजिला दर्रे के नीचे बनाई जा रही है। यह सुरंग जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग क्षेत्र के बालटाल को लद्दाख के द्रास-कारगिल क्षेत्र स्थित मीनामार्ग से जोड़ेगी। 13.153 किलोमीटर लंबी यह सुरंग समुद्र तल से लगभग 11,578 फीट यानी 3,529 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जिससे यह दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण हाई-एल्टीट्यूड रोड परियोजनाओं में शामिल हो गई है।

जोजिला टनल का निर्माण कार्य

जोजिला दर्रा दशकों से भारत के सबसे कठिन और जोखिमपूर्ण पर्वतीय मार्गों में गिना जाता रहा है। हर वर्ष सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी के कारण श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग कई महीनों तक बंद हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप कश्मीर और लद्दाख के बीच सीधा सड़क संपर्क बाधित हो जाता है, जबकि नागरिक आपूर्ति और सैन्य रसद संचालन पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में जोजिला टनल का निर्माण इस क्षेत्र के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने जा रहा है।

सुरंग के चालू होने के बाद कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर सड़क संपर्क उपलब्ध रहेगा। आवश्यक वस्तुओं और सामानों की आपूर्ति तेज होगी, पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी, स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और सामरिक दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में सैन्य गतिशीलता पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।

जोजिला टनल परियोजना को भारत की सबसे कठिन इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक माना जाता है। निर्माण के दौरान इंजीनियरों और श्रमिकों को माइनस 20 डिग्री सेल्सियस से लेकर कई बार माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान का सामना करना पड़ा। हिमस्खलन की लगातार आशंका, अत्यंत संवेदनशील और बदलती हुई हिमालयी भूगर्भीय संरचना तथा ऊंचाई पर कार्य करने की जटिल परिस्थितियों ने इस परियोजना को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए इंजीनियरों ने न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का उपयोग किया, जो चट्टानों की बदलती प्रकृति के अनुसार निर्माण तकनीकों को लगातार समायोजित करने की अनुमति देता है। निर्माण के दौरान विशेषज्ञों को 67 अलग-अलग प्रकार की चट्टानी संरचनाओं का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उत्खनन और सपोर्ट सिस्टम में बार-बार बदलाव करने पड़े।

जोजिला टनल

हालांकि जोजिला टनल इस विशाल परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन पूरा कॉरिडोर लगभग 30.9 किलोमीटर लंबा है। इस परियोजना में मुख्य जोजिला टनल के अलावा निलग्रार ट्विन टनल, स्नो गैलरी, कट-एंड-कवर सेक्शन, पुल, एप्रोच रोड और सुरक्षा संरचनाएं भी शामिल हैं। निलग्रार की जुड़वां सुरंगों की लंबाई क्रमशः 457 मीटर और 1,954 मीटर है, जबकि 450 मीटर लंबी स्नो गैलरी का भी निर्माण किया गया है।

करीब 6,800 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य 1 अक्टूबर 2020 को शुरू हुआ था। इसका निर्माण कार्य मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जबकि परियोजना की जिम्मेदारी नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के पास है। निर्माण अवधि के दौरान परियोजना ने 10 मिलियन से अधिक सुरक्षित मानव-घंटों का रिकॉर्ड भी दर्ज किया है, जो सुरक्षा मानकों के सफल पालन को दर्शाता है।

हालांकि अंतिम चट्टान का टूटना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सुरंग तुरंत यातायात के लिए खोल दी जाएगी। अभी सुरंग में कंक्रीट लाइनिंग, फिनिशिंग कार्य, आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम, विद्युत प्रतिष्ठान, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन निकासी एवं संचार प्रणाली के साथ-साथ व्यापक परीक्षण और कमीशनिंग का कार्य पूरा किया जाना बाकी है। इन सभी चरणों के सफल समापन के बाद ही वाहनों की आवाजाही शुरू हो सकेगी।

सुरंग के संचालन में आने के बाद यात्रियों को सर्दियों के दौरान खतरनाक जोजिला दर्रे से होकर गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। श्रीनगर, कारगिल और लेह के बीच पूरे वर्ष सड़क संपर्क बना रहेगा तथा यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। इससे लद्दाख में पर्यटन, व्यापार, निवेश और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

जोजिला टनल अब अटल टनल और चिनाब रेल ब्रिज जैसी भारत की अन्य ऐतिहासिक हिमालयी अवसंरचना परियोजनाओं की श्रेणी में शामिल हो गई है। ये सभी परियोजनाएं मिलकर देश के पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की नई तस्वीर गढ़ रही हैं और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच को पहले से कहीं अधिक मजबूत बना रही हैं। जोजिला टनल का यह ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, दृढ़ संकल्प और भविष्य की विकास यात्रा का प्रतीक बनकर उभरा है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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