औरंगजेब पोस्टर विवाद: मंत्री योगेश कदम बोले- प्रदर्शन में इसे उठाने वाले छात्र नहीं
महाराष्ट्र में CJP प्रदर्शन के दौरान औरंगजेब पोस्टर विवाद पर मंत्री योगेश कदम का बयान सामने आया है। उन्होंने जांच और कार्रवाई की बात कही, वहीं मुंबई चैत्यभूमि प्रदर्शन में 11 वर्षीय बच्चे की हिरासत का मामला भी सामने आया।

तस्वीर में महाराष्ट्र के मंत्री योगेश कदम एक बैठक के दौरान मेज पर बैठे हुए नजर आ रहे हैं।
महाराष्ट्र में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में हुए प्रदर्शन के दौरान औरंगजेब का पोस्टर सामने आने के मामले पर राज्य के मंत्री योगेश कदम ने बुधवार को कहा कि इसे लेकर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान औरंगजेब का पोस्टर लेकर चलने वालों को छात्र नहीं माना जा सकता।
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के मंत्री योगेश कदम ने कहा, "मैं उन्हें छात्र नहीं कहूंगा। मुझे नहीं लगता कि कोई भी छात्र अपनी मांगों से अलग किसी भी परिस्थिति में विरोध प्रदर्शन के दौरान औरंगजेब का पोस्टर लेकर जाएगा।"
कदम ने बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं और जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, "हम इस मामले की जांच कर रहे हैं और जो भी जिम्मेदार होगा, उसे सजा दी जाएगी।"
मंत्री ने बिना किसी का नाम लिए यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ नेता इस आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कह सकता कि इसका कारण क्या था, लेकिन मुझे लगता है कि विपक्ष के कुछ लोग आंदोलन को राजनीतिक बनाने की कोशिश कर रहे होंगे। विपक्षी नेता वर्तमान में युवाओं को आकर्षित करने में असमर्थ हैं, इसलिए वे इसे एक तैयार मंच के रूप में देख सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि इस घटना की पूरी जांच की जाएगी और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, मुंबई में सोमवार को चैत्यभूमि पर हुए प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों में एक 11 वर्षीय बच्चा भी शामिल था। मुंबई पुलिस ने इस प्रदर्शन को कथित रूप से अनधिकृत सभा बताते हुए कार्रवाई की थी और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।
बच्चे की मां संध्या पनास्कर ने आरोप लगाया कि वह, उनके पति और उनका बेटा प्रदर्शन स्थल से नहीं हटने पर हिरासत में लिए गए और उन्हें वर्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस द्वारा उनके पति को ले जाते हुए देखकर उनका बेटा डर गया था।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया था। पनास्कर के आरोपों पर पुलिस की प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी।
संध्या पनास्कर ने बताया कि उनका परिवार शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचा था। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाते देखकर उन्होंने अपने दोस्तों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए फोन करना शुरू किया। उनका आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने उनके परिवार को पुलिस वैन की ओर ले जाने की कोशिश की।
उन्होंने कहा, "मैं अपने बेटे के साथ वहां खड़ी थी और वे मुझे वहां से जाने के लिए कहने लगे। जब मैं नहीं गई तो किसी ने मेरे कंधे से पकड़कर मुझे वैन की ओर ले जाने की कोशिश की। मैं नहीं चाहती थी कि वे मुझे छुएं या जबरदस्ती करें।"
पनास्कर ने दावा किया कि पहले हुए प्रदर्शनों में पुलिस बच्चों के साथ मौजूद माताओं को हिरासत में लेने से बचती थी, लेकिन इस बार सभी को हिरासत में ले लिया गया।
उन्होंने बताया कि उन्हें और उनके बेटे को शाम 7 बजकर 44 मिनट पर रिहा किया गया, यानी हिरासत में लिए जाने के करीब चार घंटे बाद।
पनास्कर ने यह भी दावा किया कि वर्ली पुलिस स्टेशन में मौजूद अधिकारियों ने भी सवाल उठाया था कि बच्चे को वहां क्यों लाया गया। उन्होंने कहा, "थाने के अधिकारी भी उन पुलिसकर्मियों से पूछ रहे थे कि हमारे साथ बच्चा क्यों है।"
उन्होंने यह भी दावा किया कि एक अन्य महिला और उसकी 10 वर्षीय बेटी को भी हिरासत में लेकर उसी पुलिस स्टेशन लाया गया था। मामले में जांच और पुलिस कार्रवाई के बीच प्रदर्शन के दौरान सामने आए पोस्टर विवाद ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज कर दी है।

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