तेलंगाना के प्रसिद्ध कन्हा शांति वनम में विश्व ध्यान दिवस की भव्य गतिविधियों के बीच आज भारत के उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने ध्यान की सार्वभौमिक महत्ता और उसके आध्यात्मिक, मानसिक और सामाजिक लाभों पर प्रकाश डाला।

समारोह का शुभारंभ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और ध्यान सत्रों के माध्यम से हुआ, जिसमें देशभर और विदेशों से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया। मंच पर उपस्थित होते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ध्यान केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक स्थिरता और आंतरिक परिवर्तन का मार्ग है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विश्व ध्यान दिवस का आयोजन हमें आधुनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच ध्यान के बढ़ते महत्व को समझने और उसे अपनाने का अवसर प्रदान करता है।

इस दौरान श्री राधाकृष्णन ने कहा कि ध्यान की प्रथा किसी भी देश, संस्कृति या धर्म तक सीमित नहीं है। यह एक सार्वभौमिक साधना है, जो व्यक्ति को अपने भीतर की शांति और संतुलन खोजने में मदद करती है। उन्होंने बताया कि ध्यान से व्यक्ति न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में मानसिक स्थिरता पा सकता है, बल्कि समाज में भी सहयोग और सामंजस्य स्थापित करने में समर्थ होता है।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में ध्यान की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि नियमित ध्यान से तनाव, चिंता और मानसिक असंतुलन में कमी आती है। इसके साथ ही यह सामाजिक व्यवहार और सहिष्णुता को भी प्रोत्साहित करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्व ध्यान दिवस एक ऐसा मंच है जो समग्र मानवता के कल्याण और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करता है।

समारोह में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान योग, ध्यान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का संगम दिखा, जिसने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभव के साथ-साथ मानसिक ताजगी का अहसास कराया।

इस अवसर पर प्रशासनिक दृष्टि से आयोजनों की सुरक्षा और सुव्यवस्था पर विशेष ध्यान रखा गया। तेलंगाना राज्य सरकार ने समारोह के लिए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की थीं, जिसमें प्रतिभागियों की सुविधा और कार्यक्रम की सफलता को ध्यान में रखा गया।

समापन में उपराष्ट्रपति ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे जीवन में ध्यान को नियमित रूप से अपनाएं और इसे केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और विश्व शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण साधना के रूप में अपनाएं। उनके इस संदेश ने समारोह को न केवल आध्यात्मिक गहराई प्रदान की, बल्कि इसे जागरूकता और शिक्षा के महत्वपूर्ण आयाम से भी जोड़ा।

विश्व ध्यान दिवस के इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि ध्यान केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है, जो मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सामंजस्य और आंतरिक शांति को मजबूती प्रदान करती है। उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन के विचार और मार्गदर्शन इस दिशा में आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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