नई दिल्ली: आगामी 1 फरवरी 2026 को संसद के पटल पर रखा जाने वाला केंद्रीय बजट महज आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि देश के करोड़ों आम नागरिकों की उम्मीदों का एक नया अध्याय साबित होने वाला है। वित्त मंत्रालय के गलियारों से छनकर आ रही खबरें और आर्थिक विश्लेषकों के कयास इस बात की ओर स्पष्ट संकेत कर रहे हैं कि सरकार इस बार 'आम आदमी' की जेब और जीवनस्तर को सुधारने के लिए कुछ ऐतिहासिक कदम उठा सकती है। यद्यपि वित्त मंत्री का लाल बही-खाता अभी खुला नहीं है, किंतु प्री-बजट चर्चाओं ने मध्यम वर्ग, नौकरीपेशा और किसानों के बीच आशा की एक नई किरण जगा दी है।

इस बार के बजट में सर्वाधिक चर्चा का विषय मध्यम वर्ग की जीवनरेखा माना जाने वाला 'इनकम टैक्स' है। महंगाई के दौर में राहत की आस लगाए बैठे नौकरीपेशा वर्ग के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा में बड़े बदलाव की बयार बह रही है। सूत्रों की मानें तो सरकार मौजूदा 75,000 रुपये की सीमा को बढ़ाकर सीधे 1 लाख रुपये कर सकती है, जो करदाताओं की टैक्स योग्य आय को सीधे तौर पर कम करने में सहायक सिद्ध होगा। इसके अतिरिक्त, नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को और अधिक लुभावना बनाने के लिए सरकार उन पुराने औजारों का इस्तेमाल कर सकती है जो अब तक केवल पुरानी व्यवस्था का हिस्सा थे। इसमें स्वास्थ्य बीमा (धारा 80D) और होम लोन के ब्याज पर छूट को नई व्यवस्था में शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। साथ ही, 30 प्रतिशत के उच्चतम टैक्स स्लैब की शुरुआत को 15 लाख रुपये से ऊपर ले जाने की संभावना है, ताकि मध्यम आय वाले लोगों को भारी-भरकम टैक्स के बोझ से मुक्त किया जा सके।

सिर पर अपनी छत का सपना देखने वाले लोगों के लिए भी यह बजट एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ती कीमतों के मद्देनजर, 'अफोर्डेबल हाउसिंग' यानी किफायती घरों की परिभाषा बदलने की प्रबल संभावना है। अभी तक 45 लाख रुपये तक के घर इस श्रेणी में आते थे, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 60 से 75 लाख रुपये किए जाने की उम्मीद है, जिससे महानगरों में घर खरीदने वाले लोग भी सरकारी सब्सिडी और टैक्स छूट के दायरे में आ सकें। इसके अलावा, घर खरीदारों को बड़ी राहत देते हुए होम लोन के ब्याज पर धारा 24b के तहत मिलने वाली 2 लाख रुपये की छूट को बढ़ाकर 3 से 5 लाख रुपये करने की मांग को भी इस बजट में हरी झंडी मिल सकती है।

भारतीय रेलवे, जो आम आदमी के सफर का सबसे बड़ा साथी है, भी इस बजट के केंद्र में रहेगा। पिछले कुछ वर्षों में ट्रेनों में जनरल और स्लीपर क्लास में बढ़ी भीषण भीड़ को देखते हुए सरकार इस बार यात्री सुविधाओं पर विशेष फोकस कर सकती है। उम्मीद है कि वित्त मंत्री जनरल कोचों की संख्या में भारी बढ़ोतरी का ऐलान करेंगे ताकि कम आय वाले यात्री सम्मानजनक और सस्ते में सफर कर सकें। इसके साथ ही, रेल हादसों पर लगाम लगाने के लिए स्वदेशी तकनीक 'कवच' सिस्टम के नेटवर्क विस्तार के लिए भारी फंड आवंटन किए जाने के आसार हैं।

स्वास्थ्य और महंगाई के मोर्चे पर भी सरकार आम जनता को साधने का प्रयास करेगी। 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए आयुष्मान भारत के तहत मुफ्त इलाज की घोषणा को अमली जामा पहनाने हेतु बजट में विशेष प्रावधान और फंड जारी किए जाने की उम्मीद है। वहीं, रोजमर्रा की डिजिटल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर कस्टम ड्यूटी कम की जा सकती है, जिससे ये वस्तुएं सस्ती हो सकेंगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने के लिए 'पीएम किसान सम्मान निधि' की राशि, जो वर्तमान में 6,000 रुपये सालाना है, में बढ़ोतरी कर किसानों को खुश करने का प्रयास भी इस वित्तीय दस्तावेज का हिस्सा हो सकता है।

अंततः, यह बजट केवल वित्तीय घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह तय करेगा कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में आम आदमी की हिस्सेदारी कितनी सशक्त है। अब सभी की निगाहें 1 फरवरी की सुबह पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री देश के सामने यह स्पष्ट करेंगे कि विकास की इस दौड़ में आम आदमी के हाथ में कितनी राहत और कितनी रियायतें आने वाली हैं।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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