नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले सर्राफा बाजार के लिए बजट 2026 उम्मीद और सावधानी का एक मिला-जुला पैगाम लेकर आया है। वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए इस बजट में सोने और चांदी को लेकर सरकार का रुख काफी संतुलित नजर आ रहा है, जिसने बाजार के दिग्गजों और आम निवेशकों को एक नई चर्चा की जमीन दे दी है। इस बार के वित्तीय रोडमैप में सरकार ने कीमतों को बेलगाम होने से रोकने और बाजार में एक पारदर्शी व्यवस्था कायम करने के बीच एक महीन लकीर खींचने की कोशिश की है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में आपकी जेब और निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ने वाला है।

इस बजटीय घोषणा की सबसे अहम कड़ी आयात शुल्क यानी कस्टम ड्यूटी की स्थिरता रही है। पिछले वर्ष की ऐतिहासिक कटौती के बाद, बाजार को इस बार भी किसी बड़े फेरबदल की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने दरों को यथावत रखकर यह साफ कर दिया है कि वह फिलहाल बाजार में किसी भी तरह की कृत्रिम अस्थिरता नहीं चाहती। यह कदम घरेलू बाजार को एक ठोस आधार प्रदान करने की दिशा में देखा जा रहा है, ताकि वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय सर्राफा व्यापारियों को एक निश्चित दिशा मिल सके।

रणनीतिक स्तर पर देखा जाए तो सरकार अब निवेशकों को ईंट और सिक्कों जैसे भौतिक सोने से दूर ले जाकर डिजिटल परिसंपत्तियों की ओर मोड़ने की पुरजोर कोशिश कर रही है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को और अधिक आकर्षक बनाने के संकेत इसी रणनीति का हिस्सा हैं। इसके साथ ही, डिजिटल गोल्ड और ई-गोल्ड के लेनदेन को सरल बनाने के लिए नियमों में दी गई ढील यह दर्शाती है कि भविष्य का स्वर्ण बाजार भौतिक तिजोरियों के बजाय डिजिटल वॉलेट में अधिक सुरक्षित महसूस करेगा। सरकार की मंशा स्पष्ट है—सोने के आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर उपलब्ध स्वर्ण को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाना।

हालांकि, कीमतों के मोर्चे पर आम आदमी की नजरें अब भी वैश्विक पटल पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट ने एक घरेलू सुरक्षा कवच तो तैयार कर दिया है, लेकिन सोने-चांदी की असली चाल अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक स्तर पर डॉलर का दबदबा बढ़ता है या ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव में भारतीय सर्राफा बाजार में भी कीमतों में 'करेक्शन' यानी गिरावट का दौर देखने को मिल सकता है। इसके अतिरिक्त, गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की सफलता भी भविष्य की आपूर्ति और मांग के समीकरण को तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

फिलहाल, सर्राफा बाजार एक 'कंसोलिडेशन फेज' यानी ठहराव के दौर से गुजर रहा है। शादियों के आगामी सीजन की मांग और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं कीमतों को एक मजबूत सहारा दे रही हैं, जिससे किसी बहुत बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल क्षीण नजर आती है। अंततः, बजट 2026 ने सोने-चांदी को केवल आभूषण के रूप में नहीं, बल्कि एक आधुनिक वित्तीय साधन के रूप में स्थापित करने की नींव रख दी है, जिसका दूरगामी प्रभाव भारतीय निवेश संस्कृति पर पड़ना तय है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

Next Story