26 january यह दिवस गणतंत्र दिवस के तौर पर क्यों मनाया जाता है ? जाने इतिहास और महत्व
भारत 26 जनवरी 2026 को अपना 77वां गणतंत्र दिवस 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मना रहा है। जानिए इस ऐतिहासिक दिन का महत्व, पूर्ण स्वराज का इतिहास और कर्तव्य पथ पर होने वाली सैन्य परेड की बारीकियां। साथ ही, लाल किले में आयोजित 'भारत पर्व' और यूरोपीय नेताओं के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

why republic day is celebrated : भारत आज अपनी लोकतांत्रिक यात्रा के एक ऐतिहासिक पड़ाव पर खड़ा है। 26 जनवरी, 2026 को पूरा राष्ट्र अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे हर्षोल्लास और गौरव के साथ मना रहा है। यह दिन केवल एक तिथि मात्र नहीं, बल्कि उस संविधान के प्रति अडिग निष्ठा का प्रतीक है जिसने भारत को विविधता में एकता की एक अटूट डोर में पिरोया है। इस वर्ष का समारोह विशेष रूप से 'वंदे मातरम' के 150 गौरवशाली वर्षों को समर्पित है, जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों और राष्ट्रीय एकता की गूँज को कर्तव्य पथ पर जीवंत करेगा।
इतिहास की जड़ों से गणतंत्र का उदय गणतंत्र दिवस का महत्व उन ऐतिहासिक पन्नों में दर्ज है, जब 26 जनवरी, 1950 को भारत का अपना संविधान लागू हुआ और भारत सरकार अधिनियम (1935) को आधिकारिक रूप से विदा दी गई। इस तिथि का चयन 26 जनवरी, 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा की गई 'पूर्ण स्वराज' की उस गर्जना के सम्मान में किया गया था, जिसने औपनिवेशिक सत्ता की नींव हिला दी थी। आज, जब हम इस दिन को मनाते हैं, तो यह डॉ. बी.आर. अंबेडकर और संविधान सभा के उन मनीषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने न्याय, समानता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर आधुनिक भारत की नींव रखी।
वैश्विक मंच पर भारत और भव्य समारोह इस वर्ष गणतंत्र दिवस के वैश्विक प्रभाव को दर्शाते हुए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हैं। कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली भव्य परेड न केवल भारत की मारक सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक विरासत का एक विहंगम दृश्य भी प्रस्तुत करती है। राष्ट्रपति द्वारा ध्वजारोहण के पश्चात, आसमान में वायुसेना का शौर्य और जमीन पर राज्यों की लोक-संस्कृति का संगम एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है।
सांस्कृतिक उत्सव: 'वंदे मातरम' और 'भारत पर्व' इस वर्ष का मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने का जश्न है। इसके साथ ही, उत्सव को और अधिक व्यापक बनाने के लिए पर्यटन मंत्रालय द्वारा दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में 26 से 31 जनवरी तक 'भारत पर्व' का आयोजन किया जा रहा है।
- भारत पर्व की झलकियाँ: लाल किले के प्रांगण में चंडीगढ़, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, और दिल्ली सहित 11 राज्यों एवं डीआरडीओ की झांकियां प्रदर्शित की जाएंगी।
- विरासत का प्रदर्शन: हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों और क्षेत्रीय व्यंजनों के स्टॉल 'लघु भारत' की छवि प्रस्तुत करेंगे।
- जन भागीदारी: नागरिक सहभागिता क्षेत्र और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस पर्व को सीधे जनता से जोड़ेंगी।
संकल्पों का नया सवेरा 77वां गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि हमारा लोकतंत्र निरंतर विकसित हो रहा है। पद्म पुरस्कारों और वीरता पुरस्कारों से सम्मानित होने वाले व्यक्तित्व इस राष्ट्र की मेधा और शौर्य की बानगी पेश करते हैं। कर्तव्य पथ से लेकर लाल किले तक फैली यह गूँज भारत के एक 'विकसित राष्ट्र' बनने के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करती है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
