नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के गलियारों में इन दिनों केवल एक ही चर्चा है—'शेयर बायबैक'। बजट 2026 में केंद्र सरकार द्वारा टैक्स नियमों में किए गए आमूल-चूल बदलाव ने निवेशकों के बीच चिंता की एक गहरी लहर पैदा कर दी है। जो बायबैक अब तक निवेशकों के लिए मुनाफे का एक सुरक्षित और टैक्स-फ्री रास्ता माना जाता था, वह अब सरकारी कैंची की जद में आ चुका है। इस विधायी परिवर्तन ने न केवल निवेश की रणनीतियों को प्रभावित किया है, बल्कि सीधे तौर पर निवेशकों की जेब पर भी प्रहार किया है।

अब तक की प्रचलित व्यवस्था के अनुसार, जब कोई कंपनी अपने शेयरों को बाजार से वापस खरीदने का निर्णय लेती थी, तो उस पर लगने वाले टैक्स का बोझ कंपनी स्वयं वहन करती थी। निवेशकों के लिए यह प्रक्रिया किसी उपहार से कम नहीं थी, क्योंकि उनके हाथ में आने वाली पूरी राशि कर-मुक्त होती थी। आयकर रिटर्न दाखिल करते समय निवेशकों को इस आय पर एक भी रुपया अतिरिक्त नहीं देना पड़ता था। हालांकि, बजट 2026 के नए प्रावधानों ने इस पूरी व्यवस्था को पलट कर रख दिया है। अब बायबैक से होने वाली आय को 'डिविडेंड' या लाभांश की श्रेणी में डाल दिया गया है, जिसने कराधान के पूरे गणित को ही बदल दिया है।

नए नियमों के लागू होने के साथ ही टैक्स भुगतान की जिम्मेदारी अब कंपनियों के कंधों से उतरकर सीधे व्यक्तिगत शेयरधारकों के माथे पर आ गई है। अब बायबैक के जरिए प्राप्त आय को निवेशक की वार्षिक आय में जोड़ा जाएगा और उस पर उनके संबंधित इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार कर वसूला जाएगा। इतना ही नहीं, इस प्रक्रिया को 'शेयरों की बिक्री' के तौर पर भी देखा जाएगा, जिसका अर्थ है कि निवेशकों को अपनी होल्डिंग अवधि के आधार पर शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स का भी सामना करना पड़ेगा। यह दोहरी मार निवेशकों के शुद्ध लाभ को काफी हद तक कम कर देगी।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के तीन सबसे घातक प्रभाव सामने आएंगे। सबसे पहले, निवेशकों के हाथ में आने वाली अंतिम राशि में भारी कटौती होगी। दूसरा, अब निवेशकों के लिए टैक्स की गणना करना एक जटिल पहेली बन जाएगा, जहां उन्हें खरीद मूल्य और बायबैक मूल्य के बीच के अंतर का बारीक हिसाब रखना होगा। तीसरा और सबसे गंभीर प्रभाव उन बड़े निवेशकों पर पड़ेगा जो 30 प्रतिशत या उससे अधिक के टैक्स स्लैब में आते हैं; उनके लिए बायबैक अब मुनाफे का सौदा न रहकर एक महंगा बोझ बन गया है। सरकार का यह कदम कॉरपोरेट जगत और खुदरा निवेशकों के बीच के वित्तीय संतुलन को किस दिशा में ले जाएगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन वर्तमान में इसने निवेश के उत्साह पर एक अनिश्चितता का पर्दा जरूर डाल दिया है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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