कौन थे पूर्वांचल के गांधी ; जानिए 'बाबा राघव दास' की समाज के लिए योगदान की कहानी
12 दिसंबर को पूर्वांचल में बाबा राघव दास की जयंती मनाई जाती है। गरीबों के गांधी कहे जाने वाले बाबा राघव दास ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। उनका जीवन समाज सेवा और मानवता का प्रतीक रहा है।

बाबा राघव दास
12 दिसंबर को पूरे पूर्वांचल में बाबा राघव दास की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है। उन्हें 'गरीबों का गांधी' कहा जाता है, क्योंकि उनका जीवन गरीबों, वंचितों और समाज के पिछड़े तबके की सेवा में समर्पित रहा। बाबा राघव दास का जन्म 12 दिसंबर 1896 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में हुआ था। उनके योगदान ने न केवल समाज में बदलाव लाया, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के नए आयाम भी स्थापित किए।
बाबा राघव दास ने महात्मा गांधी के अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। उन्होंने केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता की भी लड़ाई लड़ी। उनके जीवन की विशेषता यह थी कि वे हमेशा गरीबों के बीच जाकर उनके दुख-सुख को समझते और उनके लिए कार्य करते। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी अनेक पहल की।
उनकी सेवा भावना का प्रत्यक्ष उदाहरण उनके द्वारा स्थापित “रामराज्य समाज सेवा संस्थान” और “रामकृष्ण आश्रम” हैं, जो आज भी गरीबों और जरूरतमंदों के लिए आश्रय और सहायता प्रदान कर रहे हैं। बाबा राघव दास का मानना था कि समाज में असमानता केवल कानून बदलकर नहीं, बल्कि लोगों की सोच और शिक्षा बदलकर मिटाई जा सकती है। इसी दृष्टिकोण के तहत उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया।
बाबा राघव दास की जयंती के अवसर पर विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक संस्थान कार्यक्रम आयोजित करते हैं। उनके आदर्शों और शिक्षाओं को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए व्याख्यान, सेमिनार और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी उनके योगदान को सम्मानित करते हुए कई संस्थानों और स्कूलों को उनके नाम पर स्थापित किया है।
बाबा राघव दास का जीवन इस बात का प्रतीक है कि समाज में परिवर्तन के लिए केवल पद या शक्ति की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि निरंतर सेवा, संघर्ष और समर्पण ही सबसे बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आज भी उनके विचार और आदर्श पूर्वांचल के ग्रामीण समाज में दिशा-निर्देश के रूप में कार्य करते हैं। उनके प्रयासों ने सामाजिक समरसता, गरीबों के अधिकार और शिक्षा के महत्व को स्थायी रूप से स्थापित किया।
बाबा राघव दास की जयंती न केवल उनके जीवन का उत्सव है, बल्कि यह समाज को यह स्मरण भी कराती है कि सामाजिक सेवा और मानवता के मार्ग पर चलकर हम अपने समाज को सशक्त और न्यायसंगत बना सकते हैं।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
