भारतीय सेना के इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो साहस, समर्पण और देशभक्ति की अमिट छाप छोड़ जाते हैं। मेजर मोहित शर्मा का नाम इन्हीं में शुमार है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने अद्वितीय साहस और रणनीतिक कौशल के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। मेजर मोहित शर्मा का जन्म 15 सितंबर 1975 को हरियाणा के रोहतक जिले में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) से प्रशिक्षण प्राप्त कर भारतीय सेना में अपना योगदान शुरू किया। उनकी विशेष पहचान 1 पैराशूट स्पेशल फोर्सेज (1 Para SF) में रही, जहाँ उन्होंने आतंकवाद रोधी और गुप्त अभियानों में उत्कृष्ट योगदान दिया।

मेजर शर्मा की सैन्य यात्रा बहुआयामी थी। वह न केवल सामान्य सैनिक अभियानों में सक्रिय थे, बल्कि गुप्त और खतरनाक मिशनों के लिए भी जाने जाते थे। उनकी विशेष दक्षता और साहस ने उन्हें आतंकियों के अड्डों में गुप्त प्रवेश करने और उन्हें निष्क्रिय करने की जिम्मेदारी दी। उनकी सबसे प्रसिद्ध और अंतिम मिशन दिसंबर 2008 में कुपवाड़ा जिले, जम्मू-कश्मीर में हुआ। उस समय आतंकवादी भारत में प्रवेश कर भारी हथियारों के साथ सक्रिय थे। मेजर शर्मा ने अपनी टीम के साथ मिलकर आतंकियों को निष्क्रिय करने का जोखिमपूर्ण अभियान शुरू किया। वह स्वयं गुप्त रूप से आतंकियों के बीच गए और बेहद साहसिक तरीके से उनकी भूमिका निभाई।

इस अभियान के दौरान, मेजर शर्मा और उनकी टीम आतंकियों की संख्या में बहुत कम होने के बावजूद पूरी वीरता के साथ लड़े। उन्होंने कई आतंकियों को मार गिराया और अपनी टीम और स्थानीय नागरिकों की जान बचाई। इस साहसिक मुकाबले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और अपने शौर्यपूर्ण बलिदान के साथ वीरगति प्राप्त की।

भारत सरकार ने उनके अद्वितीय साहस और देशभक्ति को देखते हुए उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया, जो भारत का सर्वोच्च शांति कालीन वीरता पुरस्कार है। उनके बलिदान ने न केवल कुपवाड़ा जिले में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को सशक्त बनाया, बल्कि भारतीय सेना के जवानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना।

मेजर मोहित शर्मा का जीवन और उनकी वीरता आज भी सैनिकों और नागरिकों के लिए साहस, निष्ठा और देशभक्ति की प्रेरणा है। उनका मिशन और बलिदान यह संदेश देता है कि देश की सुरक्षा और शांति के लिए सर्वोच्च साहस और समर्पण आवश्यक हैं। उनका नाम हमेशा भारतीय सेना के वीरों की गाथाओं में सुनहरे अक्षरों में लिखा रहेगा।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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