कौन था महमुद गजनवी? कैसे सैकड़ों ऊंटों पर लदकर गजनी ले गया था सोमनाथ का 6 टन सोना?
महमूद गजनवी के सोमनाथ मंदिर पर किए गए 16वें विनाशकारी आक्रमण की पूरी दास्तान। जानिए कैसे गजनी के सुल्तान ने 17 बार भारत पर हमला कर यहाँ की अपार संपत्ति लूटी और इतिहास में 'बुतशिकन' कहलाया। अल-बिरूनी के दौर से लेकर मंदिरों के विध्वंस और भारतीय इतिहास पर इसके दूरगामी प्रभावों का एक विस्तृत और तथ्यात्मक विश्लेषण।

नई दिल्ली। मध्यकालीन भारत के इतिहास के पन्नों में एक ऐसा नाम दर्ज है, जिसकी धमक ने 10वीं और 11वीं शताब्दी के बीच भारतीय उपमहाद्वीप को बार-बार झकझोर कर रख दिया। मध्य अफगानिस्तान के गजनी साम्राज्य का तुर्क शासक महमूद गजनवी, जिसने सन् 998 से 1030 के बीच भारत की सरजमीं पर एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 17 बार आक्रमण किए। गजनवी का इतिहास महज़ विजय गाथाओं का संकलन नहीं है, बल्कि यह उन विनाशकारी छापों और मंदिरों की लूट की एक रक्तरंजित दास्तान है, जिसने तत्कालीन भारत की सैन्य और आर्थिक व्यवस्था की नींव हिलाकर रख दी थी।
इन तमाम आक्रमणों की श्रृंखला में सन् 1025-26 का वह समय भारतीय इतिहास के सबसे काले अध्यायों में गिना जाता है, जब गजनवी की कुदृष्टि गुजरात के प्रभास पाटन स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर पर पड़ी। यह उसका 16वां आक्रमण था, जिसका उद्देश्य न केवल भारत की अपार धन-संपदा को लूटना था, बल्कि अपने धार्मिक कट्टरवाद का प्रदर्शन कर गजनी को दुनिया के सबसे भव्य शहर के रूप में स्थापित करना भी था। ऐतिहासिक वृत्तांतों के अनुसार, सोमनाथ के वैभव को जिस बेरहमी से निशाना बनाया गया, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है।
तत्कालीन इतिहासकारों के दस्तावेजी साक्ष्य बताते हैं कि मंदिर से लूटी गई संपत्ति इतनी विशाल थी कि उसे गजनी ले जाने के लिए सैकड़ों ऊंटों का काफिला कम पड़ गया था। हालांकि सोने की सटीक मात्रा को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं, लेकिन इस बात पर सर्वसम्मति है कि गजनवी ने मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित पवित्र ज्योतिर्लिंग को खंडित कर दिया था। मूर्तियों को ध्वस्त करने के इसी उन्माद के कारण इतिहास ने उसे 'बुतशिकन' यानी मूर्तियों को तोड़ने वाले के रूप में चिन्हित किया।
गजनवी का व्यक्तित्व विरोधाभासों से भरा था। एक ओर जहाँ उसने अल-बिरूनी जैसे महान विद्वान और 'शाहनामा' के रचयिता फिरदौसी को अपने दरबार में संरक्षण देकर कला और शिक्षा को बढ़ावा दिया, वहीं दूसरी ओर भारत की धरती पर उसने भीषण रक्तपात और लूटपाट का तांडव मचाया। वह दुनिया का पहला ऐसा शासक था जिसने 'सुल्तान' की उपाधि धारण की, परंतु उसकी इस सत्ता का आधार भारतीय सीमाओं के सैन्य बचाव को कमजोर करना बना। गजनवी के इन हमलों ने उत्तर-पश्चिम भारत की सुरक्षा व्यवस्था को इस कदर खोखला कर दिया कि आने वाले समय में मोहम्मद गोरी जैसे अन्य आक्रमणकारियों के लिए भारत के द्वार खुल गए। आज भी गजनवी का शासनकाल इतिहास की उन गलियों की याद दिलाता है, जहाँ एक ओर ज्ञान का संरक्षण था, तो दूसरी ओर सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों का निर्मम विनाश।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
