कौन था 11 हज़ार करोड़ का मालिक अतीक अहमद? और कैसे पुलिस और मीडिया के सामने ढेर हुए अतीक और अशरफ?
प्रयागराज में पुलिस अभिरक्षा के दौरान माफिया अतीक अहमद और अशरफ की सनसनीखेज हत्या के साथ ही अपराध के एक खूनी अध्याय का अंत हुआ। 1.4 बिलियन डॉलर की बेनामी संपत्ति और 160 से अधिक मुकदमों वाले अतीक के तांगा चालक के बेटे से सांसद बनने तक के सफर और उमेश पाल हत्याकांड से लेकर अंतिम एनकाउंटर तक की पूरी कहानी। जानें राजनीति और अपराध के इस खतरनाक गठजोड़ का पूरा विवरण।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की सियासत और जुर्म की दुनिया में दशकों तक खौफ का पर्याय रहे माफिया अतीक अहमद का अंत ठीक उसी पटकथा के अनुरूप हुआ, जैसा उसने दूसरों के लिए लिखा था। 10 अगस्त 1962 को एक निर्धन परिवार में जन्मे अतीक, जिसके पिता इलाहाबाद की सड़कों पर तांगा चलाते थे, ने कोयला चोरी और रेलवे स्क्रैप के अवैध ठेकों से अपराध के दलदल में कदम रखा था। देखते ही देखते वह 1.4 बिलियन डॉलर (₹11,684 करोड़) की बेनामी संपत्ति का स्वामी बन बैठा, लेकिन 15 अप्रैल 2023 की रात पुलिस अभिरक्षा के बीच सरेआम हुई अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या ने देश की न्याय व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधों पर गंभीर प्रश्नचिह्न अंकित कर दिए हैं।
अतीक के खूनी सफर की शुरुआत 1979 में प्रयागराज के एक कत्ल से हुई थी, जिसके बाद वह उत्तर प्रदेश में 'गुंडा एक्ट' के तहत निरुद्ध होने वाला पहला अपराधी बना। 1990 में अपने प्रतिद्वंद्वी शौकत इलाही के एनकाउंटर के पश्चात अतीक का वर्चस्व तेजी से बढ़ा। उसने 1989 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में इलाहाबाद पश्चिम सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा में प्रवेश किया और लगातार पांच बार विधायक चुना गया। समाजवादी पार्टी और अपना दल (कमेरवादी) के साथ उसका सियासी सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जिसमें वह 2004 में फूलपुर से लोकसभा सांसद भी निर्वाचित हुआ। हालांकि, 2007 में मदरसा में हुए दुष्कर्म के आरोपियों को संरक्षण देने के आरोपों के चलते उसे समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
माफिया के पतन की आधारशिला 2005 के चर्चित राजू पाल हत्याकांड से रखी गई थी। राजू पाल ने उपचुनाव में अतीक के भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ को पराजित किया था, जिसकी परिणति उनकी जघन्य हत्या में हुई। इस केस के मुख्य गवाह उमेश पाल का 2009 में अपहरण हुआ, जिसके लिए अतीक को बाद में दोषी ठहराया गया। 24 फरवरी 2023 को उमेश पाल की दिनदहाड़े बम और गोलियों से हत्या कर दी गई, जिसमें अतीक का पुत्र असद और बमबाज गुड्डू मुस्लिम मुख्य आरोपी बने। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ ने 13 अप्रैल 2023 को झांसी में असद का एनकाउंटर कर दिया।
अतीक अहमद के विरुद्ध 160 से अधिक आपराधिक मामले लंबित थे और उसने जेल की सलाखों के पीछे से भी कई चुनाव लड़े। उसका आतंक इस सीमा तक व्याप्त था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के दस न्यायाधीशों ने उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। 2016 में शियाट्स (SHUATS) के कर्मचारियों के साथ मारपीट का वीडियो प्रसारित होने के बाद उसे पुनः बंदी बनाया गया और 2019 में उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर साबरमती जेल स्थानांतरित किया गया।
अपने अंतिम क्षणों में जब अतीक और अशरफ को प्रयागराज में न्यायालय द्वारा अनिवार्य चिकित्सा परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा था, तब मीडियाकर्मी के भेष में आए तीन हमलावरों ने उनके सिर में पॉइंट-ब्लैंक रेंज से गोलियां दाग दीं। अतीक के अंतिम शब्द "उन्होंने मुझे नहीं जाने दिया, इसलिए मैं नहीं गया" (अपने पुत्र के जनाजे के संदर्भ में) अभी अधूरे ही थे कि गोलियों की गूँज ने उसे और उसके भाई को सदा के लिए शांत कर दिया। हमलावरों ने "जय श्री राम" के उद्घोष के साथ आत्मसमर्पण किया और स्वीकार किया कि वे अतीक के गिरोह का सफाया कर अपना नाम कमाना चाहते थे।
इस घटनाक्रम पर तीव्र राजनीतिक प्रतिक्रियाएं व्यक्त की गईं। राजू पाल की विधवा पूजा पाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी ने इसे कानून व्यवस्था की विफलता निरूपित किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सघन सुरक्षा के मध्य ऐसी हत्या किसी की संलिप्तता की ओर संकेत करती है। अतीक अहमद का अंत मात्र एक माफिया युग का समापन नहीं है, अपितु यह राजनीति और अपराध के उस खतरनाक गठजोड़ का भी स्मरण कराता है जिसने दशकों तक संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती दी थी।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
