आज यानी 22 नवंबर 2025 को Shillong Teer का पूरा खाका शानदार उत्साह के साथ सामने आया है। सुबह-सवेरे से लेकर रात के सत्र तक, इस पारंपरिक धनराशि-लॉटरी ने पूर्वोत्तर भारत में रोज़मर्रा की जिन्दगी के साथ एक अनूठा खेल-संघटन बना रखा है। इस खेल का आयोजन Khasi Hills Archery Sports Association (KHASA) द्वारा किया जाता है, और यह सिर्फ एक लॉटरी नहीं बल्कि क्षेत्र की लोक-संस्कृति एवं धनकुंभ का मिलन भी है।

खेल की शुरुआत सुबह होती है, जब SHILLONG MORNING TEER के पहले और दूसरे राउंड के विजेता अंकों की घोषणा क्रमशः 10:30 एएम एवं 11:30 एएम में की जाती है। इसके बाद JUWAI MORNING TEER पहला राउंड 10:35 एएम, दूसरा 11:35 एएम में संपन्न हुआ। दोपहर में JUWAI TEER का पहला राउंड 2:00 पीएम, दूसरा 2:45 पीएम घोषित किया गया। उसके पश्चात मुख्य सत्र SHILLONG TEER का पहला राउंड 3:44 पीएम, दूसरा राउंड 4:30 पीएम में सार्वजनिक हुआ। इसके तुरंत बाद KHANAPARA TEER का पहला राउंड 3:58 पीएम, दूसरा 4:40 पीएम में परिणाम घोषित हुआ। और अंत में SHILLONG NIGHT TEER का पहला राउंड 8:18 पीएम, दूसरा 9:00 पीएम में परिणाम का खुलासा हुआ।

इन सभी राउंड में विजेता संख्याएँ इस प्रकार खेल-दांव में लगे लोगों द्वारा बड़ी उम्मीदों के साथ देखी जाती हैं। इसके पीछे सिर्फ पैसा नहीं बल्कि सामाजिक-खेल-परम्परा का एक जीवंत रूप है, जहाँ बौछारों की तेजी, लक्ष्य में कमानों की कौशल और दर्शकों की उत्तेजना तीनों सम्मिलित होती है।

क्या है ‘शिलाँग तीर’ लॉटरी?

यह कोई आम लॉटरी नहीं, बल्कि तीरंदाजी के कौशल पर आधारित एक पारंपरिक खेल है—शिलांग तीर। यहां भाग्य और अनुमान की बाज़ी तीरों की रफ़्तार पर चलती है, और पलभर में करोड़ों का खेल तय हो जाता है। जैसे ही तीरंदाज अपने धनुष पर तीर चढ़ाते हैं, खिलाड़ियों की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं, क्योंकि अगले कुछ ही क्षणों में उनकी किस्मत का फैसला होना होता है।

शिलांग तीर का संचालन प्रत्येक दिन दो राउंड में किया जाता है। पहले राउंड में कुशल तीरंदाज कुल 30 तीर चलाते हैं, जबकि दूसरे राउंड में यह संख्या 20 होती है। इन सभी तीरों का लक्ष्य एक गोलाकार तीरंदाजी बोर्ड होता है, और खेल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होता है कि कितने तीर सही निशाने पर लगते हैं। खिलाड़ियों को 0 से 99 तक किसी एक संख्या का चयन करना होता है और अनुमान लगाना होता है कि कुल कितने तीर लक्ष्य पर साधेंगे। यही संख्या निकलती है जीतने वाला नंबर, जो कई घरों में खुशियों की सौगात बनकर पहुंचता है।

इस खेल की खासियत यह है कि यह तीर संगठन के नियमों के अनुसार पूरी तरह कानूनी रूप से संचालित होता है। मेघालय तीर संघ इस पारंपरिक खेल को केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का साधन भी मानता है। तीरंदाजी प्रतियोगिताओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर पर्यटन भी बढ़ता है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। यही वजह है कि यह खेल वर्षों से अपनी लोकप्रियता में लगातार वृद्धि दर्ज करा रहा है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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