क्या है 48 घंटे का निरंतर 'अखंड पाठ'; गुरु नानक जयंती पर इसका विशेष महत्व..
गुरु नानक जयंती पर 48 घंटे का अखंड पाठ गुरु ग्रंथ साहिब के निरंतर पाठ के रूप में आयोजित किया जाता है। यह परंपरा सिख समुदाय में भक्ति, अनुशासन, सेवा और सामाजिक एकता का प्रतीक मानी जाती है।

गुरु नानक जयंती अखंड पाठ
सिख धर्म का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार गुरु नानक जयंती है, जो सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के जन्मदिवस के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन पूरे विश्व में सिख धर्मावलंबी उनके जीवन और शिक्षाओं का स्मरण करते हैं। गुरु नानक जयंती पर सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक क्रियाओं में से एक है अखंड पाठ। अखंड पाठ का अर्थ है गुरु ग्रंथ साहिब का लगातार, बिना रुके पाठ। 'अखंड' का मतलब है 'अविरल' और 'पाठ' का अर्थ है 'पढ़ाई या पाठ।' यह आमतौर पर लगभग 48 घंटे तक लगातार चलता है और इसे पूरा करने के लिए कई पाठक या 'पठी' बदल-बदल कर पढ़ते हैं। इसका उद्देश्य केवल ग्रंथ का पठन नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से आध्यात्मिक शांति, समर्पण और समाज में एकता का संदेश फैलाना भी है।
अखंड पाठ की शुरुआत गुरुद्वारे या किसी साफ-सुथरे घर में की जाती है। गुरु ग्रंथ साहिब को एक ऊँचे स्थान पर रखा जाता है, जिसे पलकी साहिब कहा जाता है और इसे साफ और सम्मानजनक कपड़े से ढका जाता है। पाठ शुरू करने से पहले संगीतमय कीर्तन और प्रार्थना (अर्दास) की जाती है। पाठ के दौरान पाठक बारी-बारी से पवित्र ग्रंथ का निरंतर पाठ करते हैं। इस समय भक्तगण ध्यान, कीर्तन और भजन में लीन रहते हैं।अखंड पाठ केवल धार्मिक उद्देश्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सेवा (सेवा) का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। भक्तगण लंगर तैयार करते हैं, सफाई करते हैं और पाठ के सुचारू संचालन में मदद करते हैं। इस प्रकार अखंड पाठ के माध्यम से सामाजिक समरसता और समानता का संदेश भी मिलता है।
अखंड पाठ का महत्व धार्मिक अनुशासन और समर्पण में है। यह 48 घंटे तक लगातार चलता है और इसे पूरा करने के लिए पाठक और भक्तों को समय और ऊर्जा का समर्पण करना पड़ता है। यह भक्ति, धैर्य और अनुशासन का उत्तम उदाहरण प्रस्तुत करता है। पाठ पूरा होने पर आयोजित भोग समारोह और कराह प्रसाद सभी के बीच समानता और आध्यात्मिक आशीर्वाद का अनुभव कराता है।
पाठ के पूरा होने पर भोग समारोह आयोजित किया जाता है। भोग के दौरान अंतिम श्लोकों का पाठ किया जाता है और फिर अर्दास की जाती है, जिसमें सभी की भलाई और गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का पालन करने की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद कराह प्रसाद का वितरण किया जाता है, जो सभी के बीच समानता और भाईचारे का प्रतीक है। गुरु नानक जयंती पर अखंड पाठ का आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों की प्राप्ति का मार्ग भी है। यह पाठ भक्तों को गुरु नानक देव जी की समानता, करुणा, और सेवा की शिक्षा याद दिलाता है।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
