भारत में श्रमिकों के अधिकार और रोजगार सुरक्षा को मजबूती देने के लिए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य कार्यदशा संहिता, 2020 ने नई दिशा निर्धारित की है। संहिता के तहत अब हर श्रमिक को नियत प्रारूप में नियुक्तिपत्र दिया जाएगा, जिसमें व्यक्तिगत विवरण, पद, श्रेणी, वेतन और सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान स्पष्ट रूप से उल्लेखित होंगे। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि रोजगार में सुरक्षा और न्यायसंगत लाभ सुनिश्चित होते हैं।

संहिता में सवैतनिक अवकाश की शर्तों में सुधार किया गया है। अब श्रमिक को साल में 180 दिन काम करने पर वेतन सहित अवकाश मिलेगा, जबकि पहले यह सीमा 240 दिन थी। इसके अलावा, कामकाज के घंटे प्रतिदिन 8 और साप्ताहिक 48 से अधिक नहीं होंगे। श्रमिक की सहमति से ओवरटाइम की व्यवस्था भी पारदर्शी और लाभकारी बनाई गई है, जिसमें अतिरिक्त काम के लिए दोगुनी दर पर भुगतान की सुविधा है।

अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों (आईएसएमडब्ल्यू) के हितों को भी संहिता में विशेष स्थान दिया गया है। प्रवासी श्रमिकों को 12 महीने में एक बार अपने घर आने-जाने के लिए भत्ता मिलेगा और निर्माण कार्य में उन्हें बीओसीडब्ल्यू लाभ तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन का प्रावधान प्राप्त होगा। साथ ही, प्रवासी और असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के कदम उठाए गए हैं, जिससे उनके कौशल और सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित किए जा सकेंगे।

संहिता में पीड़ित श्रमिकों के मुआवजे की व्यवस्था भी सुदृढ़ की गई है। गंभीर शारीरिक चोट या मृत्यु की स्थिति में अदालत न्युक्तकर्ता पर जुर्माने की कम-से-कम 50 प्रतिशत राशि मुआवजे के रूप में लगाकर श्रमिक के हित सुरक्षित करेगी। श्रव्य-दृश्य और डिजिटल मीडिया कर्मियों, जैसे डबिंग कलाकार और स्टंट कर्मियों, को भी कानूनी सुरक्षा और कार्यस्थल पर सुरक्षा के लाभ दिए गए हैं।

सुरक्षा समितियों के गठन और स्वास्थ्य, सुरक्षा व कल्याण के सार्वभौमिक कवरेज से कार्यस्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। राष्ट्रीय व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सलाहकार बोर्ड अब सभी क्षेत्रों के लिए मानक निर्धारित करता है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक सुरक्षा कोष की स्थापना, अपराधों का गैर-आपराधिकरण, तृतीय-पक्ष ऑडिट, रिकॉर्ड डिजिटाइज़ेशन और निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता जैसी व्यवस्थाओं ने संहिता को आधुनिक, पारदर्शी और विकास-सहायक बनाया है।

महिला श्रमिकों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्हें सभी प्रतिष्ठानों में काम करने की अनुमति और सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित किए गए हैं। 50 या अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों में साझा क्रेच सुविधा की व्यवस्था से कार्य और परिवार के बीच संतुलन को बढ़ावा मिलेगा।

संहिता के संशोधित प्रावधान छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए व्यवसाय में सरलता, रोजगार सृजन और औपचारिककरण की संभावनाओं को बढ़ाते हैं। डिजिटल पंजीकरण, एकल रिटर्न और 5 वर्ष तक वैध लाइसेंस की सुविधा से कारोबार में सुगमता और औद्योगिक विकास सुनिश्चित होता है।

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य कार्यदशा संहिता, 2020 श्रमिकों के अधिकारों को सशक्त बनाकर, रोजगार और उद्यमशीलता दोनों को प्रोत्साहित करने वाला एक अभूतपूर्व कदम है। यह भारत के समावेशी और संवहनीय विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप सुरक्षित, निष्पक्ष और अधिक उत्पादक कार्यबल की नींव रखती है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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