TMC का BJP अध्यक्ष नितिन नबीन पर बड़ा आरोप; सुरक्षा वाहनों के दुरुपयोग पर गरमाई सियासत
तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अशोकनगर और नदिया में चुनाव प्रचार के लिए अपनी जेड श्रेणी की सुरक्षा के सरकारी वाहनों का इस्तेमाल किया।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन
Nitin Nabin BJP President Bengal campaign : पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पर चुनावी अभियान के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों के वाहनों का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगाया है। टीएमसी का दावा है कि भाजपा के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष, जिन्हें जनवरी 2026 में 'जेड' श्रेणी की सीआरपीएफ सुरक्षा प्रदान की गई थी, अशोकनगर और नदिया जैसे प्रमुख चुनावी क्षेत्रों में प्रचार के लिए सरकारी सुरक्षा वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह विवाद एक 18 सेकंड के वीडियो क्लिप के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शुरू हुआ है, जिसमें सुरक्षा काफिले को चुनाव प्रचार से जुड़ी गतिविधियों में संलिप्त होने का दावा किया जा रहा है।
The Armed Forces have also been perceived as lenient toward the BJP in the past. pic.twitter.com/LROAx75jV2
— Manish RJ (@mrjethwani1) April 27, 2026
टीएमसी ने इस घटना को सत्ता का घोर दुरुपयोग करार देते हुए चुनाव आयोग की तटस्थता पर भी सवाल खड़े किए हैं। आगामी 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान से पहले यह मुद्दा राज्य में एक बड़ी बहस का केंद्र बन गया है। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ताओं का कहना है कि जहां एक ओर राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सीआरपीएफ की भारी तैनाती की गई है, वहीं दूसरी ओर इन बलों का उपयोग सत्तारूढ़ दल के नेताओं की चुनावी रैलियों में सहायता के लिए किया जा रहा है। विशेष रूप से नदिया और अशोकनगर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा वाहनों की उपस्थिति को लेकर मतदाताओं के बीच एक अलग संदेश जाने की आशंका जताई गई है।
CRPF beasts (armored vehicles) have arrived for deployment to ensure a free and fair second phase of the West Bengal elections. pic.twitter.com/x3bOnQBCZ0
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) April 26, 2026
कानूनी और आधिकारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो चुनाव आचार संहिता के तहत किसी भी सरकारी संसाधन या सुरक्षा तंत्र का उपयोग सीधे तौर पर राजनीतिक प्रचार के लिए करना प्रतिबंधित है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर अब तक भारतीय जनता पार्टी, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) या भारत निर्वाचन आयोग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या टिप्पणी सामने नहीं आई है। चुनाव आयोग के समक्ष इस मामले की शिकायत पहुंचने की खबरें हैं, जिस पर आयोग के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं। बंगाल चुनाव के इस दो-चरणीय महाकुंभ में सुरक्षा बलों की भूमिका और निष्पक्षता पर उठ रहे ये सवाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं, जो भविष्य के मतदान चरणों पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
