पश्चिम बंगाल चुनाव में मतदाता सूची से हटे 91 लाख नाम; सियासी संग्राम शुरू
पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले मतदाता सूची से 91 लाख नाम हटने पर मचा सियासी घमासान। टीएमसी और बीजेपी के बीच छिड़ी इस जंग की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची
West Bengal Voter List Revision, EC Voter Deletion : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की दहलीज पर खड़े राज्य में उस वक्त राजनीतिक तापमान चरम पर पहुँच गया, जब चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Revision) के बाद लगभग 91 लाख नाम हटा दिए गए। राज्य के कुल मतदाताओं का 12% हिस्सा रही यह कटौती महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया न रहकर एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। आयोग ने इस बड़े कदम के पीछे मतदाताओं की मृत्यु, पलायन, अनुपस्थिति, दोहरी प्रविष्टियों और 'लॉजिकल एरर' जैसे तकनीकी कारणों का हवाला दिया है, लेकिन चुनावी समर के बीच इस फैसले ने सत्तापक्ष और विपक्ष को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हुए विशेष रूप से उन क्षेत्रों और मुस्लिम बाहुल्य इलाकों को निशाना बनाया है जो टीएमसी के गढ़ माने जाते हैं। इस विवाद को तब और हवा मिली जब प्रसिद्ध यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक वीडियो में सॉफ्टवेयर की खामियों और प्रमुख जिलों में असामान्य रूप से उच्च विलोपन (Deletion) दरों का मुद्दा उठाया गया। टीएमसी का दावा है कि इन तकनीकी त्रुटियों ने हजारों वैध मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकार को खतरे में डाल दिया है।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए चुनाव आयोग के इस कदम का जोरदार समर्थन किया है। बीजेपी का तर्क है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को 'शुद्ध' करने और अवैध प्रवासियों द्वारा डाले जाने वाले 'फर्जी वोटों' को हटाने के लिए अनिवार्य थी। आंकड़ों का हवाला देते हुए बीजेपी ने स्पष्ट किया कि हटाए गए नामों में से 63% नाम हिंदू मतदाताओं के हैं, जो किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक या क्षेत्रीय पक्षपात के दावों को झुठलाते हैं। पार्टी का कहना है कि एक पारदर्शी लोकतंत्र के लिए सटीक मतदाता सूची आधारभूत आवश्यकता है।
इस पूरे घटनाक्रम पर कानूनी मुहर भी लग चुकी है। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने पुनरीक्षण की इस प्रक्रिया की समीक्षा के बाद इसे अपनी स्वीकृति दे दी है, जिससे आयोग के प्रशासनिक निर्णयों को वैधानिक मजबूती मिली है।
🚨91 लाख वोटर डिलीट 🚨
— Dhruv Rathee Satire (@DhruvRathenx) April 11, 2026
ध्रुव राठी का एक और नया धमाका फूट चुका है👇
इस वीडियो में, जांच का विश्लेषण है:
कैसे एक ऐसे सॉफ्टवेयर ने, जिसका कभी परीक्षण नहीं किया गया था, यह तय किया कि कौन भारतीय है और कौन नहीं pic.twitter.com/MznkkFFOhd
चुनाव आयोग द्वारा बताए गए विलोपन के मुख्य आधार :
- मृत्यु और पलायन: ऐसे मतदाता जो अब उस क्षेत्र में नहीं रहते या जिनकी मृत्यु हो चुकी है।
- दोहरी प्रविष्टियां (Duplicates): एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक मतदान केंद्रों पर दर्ज होना।
- लॉजिकल एरर: डेटा प्रविष्टि के दौरान नाम या पते में विसंगतियां।
आगामी 23 से 29 अप्रैल के बीच राज्य की 294 विधानसभा सीटों पर होने वाले मतदान के लिए अब मतदाता सूचियों को 'फ्रीज' कर दिया गया है। 91 लाख मतदाताओं का सूची से बाहर होना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक ऐसा मोड़ है जो बंगाल की चुनावी दिशा को प्रभावित कर सकता है। अब देखना यह होगा कि मतदान के दिन यह 'शुद्धिकरण' प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूती देती है या फिर एक नए विवाद की नींव बनती है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
