Suvendu Adhikari West Bengal cabinet decisions : पश्चिम बंगाल की नई प्रशासनिक व्यवस्था ने अपनी दूसरी कैबिनेट बैठक में लोक-लुभावन और प्रशासनिक सुधारों का एक ऐसा पिटारा खोला है, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने पांच ऐतिहासिक फैसलों पर मुहर लगाते हुए राज्य की महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशियों की सौगात पेश की है। सरकार ने न केवल आर्थिक सहायता के जरिए आधी आबादी को सशक्त बनाने का संकल्प लिया है, बल्कि लंबे समय से प्रतीक्षित सातवें राज्य वेतन आयोग के गठन को मंजूरी देकर प्रशासनिक अमले को भी बड़ी राहत दी है।

कैबिनेट की इस उच्च-स्तरीय बैठक के समापन के बाद, महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से सरकार की नई 'अन्नपूर्णा योजना' का खाका पेश किया। उन्होंने घोषणा की कि आगामी 1 जून से राज्य की महिलाओं के बैंक खातों में ₹3000 की मासिक सहायता राशि सीधे हस्तांतरित की जाएगी। यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, परिवहन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी निर्णय लेते हुए सरकार ने महिलाओं के लिए सरकारी बसों में यात्रा पूरी तरह से निःशुल्क कर दी है। मंत्री पॉल ने स्पष्ट किया कि 'लक्ष्मी भंडार' योजना का लाभ लेने वाली महिलाएं स्वतः ही 'अन्नपूर्णा भंडार' योजना की लाभार्थी बन जाएंगी और शेष पात्र महिलाओं के लिए जल्द ही एक नया आवेदन पोर्टल खोला जाएगा।

प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में बढ़ते हुए, शुभेंदु सरकार ने राज्य कर्मचारियों, संबद्ध वैधानिक निकायों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए सातवें राज्य वेतन आयोग के गठन की आधिकारिक घोषणा की है। इस निर्णय से राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में व्यापक सुधार की उम्मीद है, जो काफी समय से इसकी मांग कर रहे थे। एक अन्य महत्वपूर्ण और नीतिगत फैसले में, कैबिनेट ने धार्मिक वर्गीकरण के आधार पर विभिन्न समूहों को दी जाने वाली सरकारी सहायता को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्णय लिया है, जो सरकार के 'समान न्याय' के दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।

उल्लेखनीय है कि अपनी पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत योजना को लागू करने और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भूमि हस्तांतरण जैसे कड़े फैसले लेने के बाद, सरकार ने अब सामाजिक कल्याण पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। कैबिनेट ने भारतीय न्याय संहिता को लागू करने और हिंसा में जान गंवाने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं के परिवारों की जिम्मेदारी लेने का जो संकल्प पहले ही दोहराया था, उसे इन नए फैसलों से और अधिक बल मिला है। ये तमाम निर्णय न केवल पश्चिम बंगाल के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को बदलने की क्षमता रखते हैं, बल्कि आने वाले समय में राज्य के विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता की नई इबारत भी लिखेंगे।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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