गंगा इफ्तार पार्टी मामले में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश ; इन आरोपियों को मिली जमानत, 18 मई को अगली सुनवाई
वाराणसी में गंगा नदी पर कथित इफ्तार पार्टी और अपशिष्ट फेंकने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 8 आरोपियों को जमानत दी। मार्च 2026 के वायरल वीडियो से जुड़े इस मामले में 14 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। शेष 6 आरोपियों की याचिका पर 18 मई को सुनवाई होगी।

वाराणसी में गंगा नदी पर नाव में इफ्तार करते लोग
वाराणसी में गंगा नदी की लहरों पर आयोजित एक कथित इफ्तार पार्टी से जुड़े विवाद ने अब न्यायिक प्रक्रिया में अहम मोड़ ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों को जमानत प्रदान कर दी है, जबकि शेष छह आरोपियों की याचिकाओं पर सुनवाई आगामी 18 मई को निर्धारित की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पारित किया।
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब मार्च 2026 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कुछ लोग वाराणसी में गंगा नदी पर नाव में इफ्तार करते और कथित रूप से भोजन के अवशेष नदी में फेंकते दिखाई दिए। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा की और इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने तथा नदी प्रदूषण से जोड़कर देखा गया।
वाराणसी पुलिस की हिरासत में खड़े इफ्तार विवाद के आरोपी
मामले में भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रजत जायसवाल ने 16 मार्च को वाराणसी के कोतवाली थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों पर धार्मिक भावनाएं भड़काने, सार्वजनिक उपद्रव और गंगा नदी को प्रदूषित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
हाईकोर्ट में इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने सभी 14 आरोपियों की जमानत याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध किया। प्रारंभिक सुनवाई में दानिश सैफी, आमिर कैफी और नुरुल इस्लाम सहित आठ याचियों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर विचार किया गया, जिसके बाद अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अन्य छह आरोपियों की याचिकाएं अब अगली सुनवाई में विचाराधीन रहेंगी।
यह मामला केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी व्यापक बहस को जन्म दिया है। गंगा जैसी पवित्र नदी में कथित गतिविधियों को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक सतर्कता और कानून व्यवस्था की भूमिका को भी केंद्र में ला दिया है। फिलहाल, अदालत की आगामी सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, जहां शेष आरोपियों की किस्मत का निर्णय तय होगा।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
