Vadodara International Kite Festival : आसमान में घुली 'वसुधैव कुटुंबकम' की मिठास; 50 देशों के हुनरमंदों ने भरी उड़ान
Vadodara International Kite Festival में दिखी 'वसुधैव कुटुंबकम' की झलक! 20 देशों और 8 भारतीय राज्यों के 160 से अधिक पतंगबाजों ने वडोदरा के आसमान को अनोखी आकृतियों से सजाया। प्रधानमंत्री मोदी के विजन और गुजरात पर्यटन के इस शानदार समन्वय की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें। ऊंझा जलेबी और सांस्कृतिक मेलजोल ने बनाया इसे और भी खास।

Vadodara International Kite Festival : गुजरात की सांस्कृतिक राजधानी वडोदरा का आकाश मंगलवार को उस समय जीवंत हो उठा, जब 'अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026' का औपचारिक आगाज हुआ। गुजरात टूरिज्म, जिला प्रशासन और वडोदरा महानगरपालिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव ने 'वसुधैव कुटुंबकम' (दुनिया एक परिवार है) के भारतीय दर्शन को वैश्विक पटल पर चरितार्थ कर दिया। विभिन्न महाद्वीपों से आए पतंगबाजों ने जब अपनी पारंपरिक और विशालकाय पतंगें हवा में छोड़ीं, तो पूरा शहर उसे टकटकी लगाए देखता रह गया।
रंगों और संस्कृतियों का महासंगम: 160 से अधिक पतंगबाजों की भागीदारी
इस वर्ष का महोत्सव अपनी भव्यता और विविधता के कारण विशेष चर्चा में है। महोत्सव में रिकॉर्ड 20 से अधिक देशों और भारत के विभिन्न राज्यों से आए 160 से अधिक पतंगबाजों ने हिस्सा लिया है।
- विदेशी मेहमान: ऑस्ट्रेलिया, यूके, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और थाईलैंड जैसे देशों के हुनरमंदों ने अपनी संस्कृति को दर्शाती अनोखी आकृतियों की पतंगों का प्रदर्शन किया।
- भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व: विदेशी प्रतिभागियों के साथ-साथ बिहार, राजस्थान और तमिलनाडु सहित देश के 8 राज्यों से आए पतंगबाजों ने भी अपनी स्थानीय कला का शानदार प्रदर्शन किया।
पीएम मोदी के 'विजन' का साकार रूप :
कार्यक्रम के दौरान वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी ने इस आयोजन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन का परिणाम बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि जब पीएम मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तभी उन्होंने इन आयोजनों के माध्यम से पर्यटन और सांस्कृतिक एकता का जो सपना देखा था, वह आज वडोदरा की धरती पर 'वसुधैव कुटुंबकम' के रूप में साफ नजर आ रहा है।
वडोदरा के म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू ने बताया कि प्रशासन ने इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को सफल बनाने के लिए पुख्ता प्रबंध किए हैं। कार्यक्रम के समापन पर मेहमानों के लिए वडोदरा की प्रसिद्ध 'ऊंझा जलेबी' की विशेष व्यवस्था की गई, जिसने इस विदेशी और स्वदेशी मेलजोल में मिठास घोल दी।
एक धागे से जुड़ा विश्व: उत्सव का सामाजिक प्रभाव
यह महोत्सव केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि वडोदरा की जनता और वैश्विक मेहमानों के बीच भावनात्मक सेतु का काम कर रहा है। जनप्रतिनिधियों और हजारों शहरवासियों की उपस्थिति ने इस बात को पुख्ता किया कि वडोदरा की जनता वैश्विक अतिथियों का स्वागत अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ करने में अग्रणी है।
सुरक्षा के कड़े इंतजामों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच, यह आयोजन पर्यावरण अनुकूल और सुरक्षित उत्सव की नई मिसाल पेश कर रहा है। वडोदरा का यह अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव न केवल गुजरात के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है, बल्कि दुनिया भर के लोगों के बीच भाईचारे के संदेश को भी मजबूती दे रहा है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
