बुधवार को सचिवालय मीडिया सेंटर में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), देहरादून की ओर से ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें Solid Waste Management Rules, 2026, डंपसाइट रिमेडिएशन, कचरा पृथक्करण, वायु प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय निकायों की भूमिका की विस्तृत जानकारी साझा की गई।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धाकटे ने कहा कि तेजी से हो रहे शहरीकरण के साथ कचरे की मात्रा बढ़ रही है। ऐसे में जमीनी स्तर तक वैज्ञानिक और डेटा आधारित दृष्टिकोण अपनाने के साथ जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ वायु के लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किए जा सकते, बल्कि सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से लागू Solid Waste Management Rules, 2026 में कचरे को चार धाराओं—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे—में अलग करने पर जोर दिया गया है। Bulk Waste Generators (BWGs) की जिम्मेदारियां भी मजबूत की गई हैं और Extended Bulk Waste Generators Responsibility (EBWGR) का प्रावधान किया गया है। नियमों के तहत कचरे के संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण और निस्तारण की ऑनलाइन निगरानी के साथ डिजिटल पंजीकरण और रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना, कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग को बढ़ावा देना और सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करना है। रीसाइक्लिंग और पुन: उपयोग को प्राथमिकता दी गई है, जबकि लैंडफिल को अंतिम विकल्प रखा गया है।

डॉ. धाकटे ने बताया कि उत्तराखंड के 108 Urban Local Bodies के सभी 1,314 वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। वर्तमान में करीब 1,515 वाहन उपलब्ध हैं और अतिरिक्त वाहनों की खरीद की प्रक्रिया चल रही है। नए वाहनों को चार-स्ट्रीम कचरा पृथक्करण के लिए चार कंपार्टमेंट से लैस किया जा रहा है। 1,225 वार्डों में स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण शुरू हो चुका है। राज्य में प्रतिदिन करीब 1,930.85 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से 1,804.59 मीट्रिक टन यानी 93.46 प्रतिशत कचरे का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है।

राज्य में कुल 61 legacy waste/dumpsites चिन्हित किए गए हैं। करीब 23.34 लाख मीट्रिक टन legacy waste में से 12.70 लाख मीट्रिक टन यानी 54.41 प्रतिशत के उपचार का काम पूरा हो चुका है। राज्य का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक legacy waste treatment और dumpsite remediation की गति तेज करना है। वर्तमान में राज्य में 85 Material Recovery Facilities (MRFs), 663 NADEP/compost pits और 87 plastic compactors संचालित हैं, जबकि 1,058 Bulk Waste Generators की पहचान की गई है। कचरा संग्रहण और परिवहन की निगरानी के लिए Vehicle Location Tracking System (VLTS) लागू किया जा रहा है और पहले चरण में सभी नगर निगमों को इसके दायरे में शामिल किया जा रहा है।

शहरी विकास के अपर निदेशक श्री प्रवीण कुमार ने Solid Waste Management Rules के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने नियमों के अनुपालन, BWGs की जवाबदेही, डिजिटल पंजीकरण, निगरानी और अनधिकृत कचरा डंपिंग के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई पर जोर दिया है। भारत ‘Zero Dumpsite’ के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। डंपसाइट रिमेडिएशन के तहत legacy waste का वैज्ञानिक तरीके से उपचार कर उसे सड़क निर्माण सामग्री, filling material, recyclable materials और RDF जैसे उपयोगी संसाधनों में बदला जा रहा है। इससे वायु और भूजल प्रदूषण कम करने के साथ डंपसाइट में आग लगने की घटनाओं को भी कम करने में मदद मिलती है।

श्री प्रवीण कुमार ने कहा कि मेयरों, पार्षदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से नागरिकों को स्रोत पर चार-स्ट्रीम कचरा पृथक्करण, प्लास्टिक के जिम्मेदार इस्तेमाल और स्वच्छता मानकों के पालन के लिए प्रेरित करने को कहा गया है। RWAs, होटल, रेस्तरां और अन्य Bulk Waste Generators की ओर से उचित कचरा प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान जरूरी है। चार धाम और अन्य पर्यटन क्षेत्रों में बढ़ती तीर्थयात्रा और पर्यटन गतिविधियों को देखते हुए इन क्षेत्रों में उचित कचरा संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और वैज्ञानिक प्रसंस्करण के लिए विशेष योजना तैयार करने पर जोर दिया गया। स्वच्छ वायु और प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए सरकार, स्थानीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, संस्थानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और नागरिकों की सामूहिक भागीदारी को आवश्यक बताया गया।

उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों और द्वीपों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इनमें पर्यटकों से user fees का संग्रह और कचरा प्रबंधन सुविधाओं की उपलब्धता के आधार पर स्थानीय निकायों द्वारा पर्यटकों के आगमन को नियंत्रित करना शामिल है। इन क्षेत्रों में गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे के लिए विशेष collection centres स्थापित किए जाएंगे। स्थानीय निवासियों को कचरा स्थानीय निकायों को सौंपने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और खुले में कचरा फैलाने से रोका जाएगा। होटल और रेस्तरां SPCB या PCC द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार गीले कचरे का विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण करेंगे।

Solid Waste Management Rules, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय और राज्य स्तर पर समितियों के गठन का भी प्रावधान है। राज्य या केंद्रशासित प्रदेश स्तर पर राज्य के मुख्य सचिव या केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन के प्रमुख की अध्यक्षता में समिति गठित होगी, जो नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उपायों की सिफारिश करेगी। उत्तराखंड में चार-स्ट्रीम पृथक्करण, डिजिटल निगरानी, डंपसाइट उपचार और जमीनी स्तर पर जनभागीदारी को साथ लेकर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

Pratahkal Bureau

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