ओलंपिक-2036 की तैयारी: उत्तराखण्ड में 100 से 150 प्रतिभावान बच्चों की होगी पहचान
ओलंपिक-2036 की तैयारी को लेकर उत्तराखण्ड में खेल प्रतिभाओं की पहचान और वैज्ञानिक प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने 100 से 150 प्रतिभावान बच्चों के चयन की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए।

तस्वीर में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन और अन्य अधिकारी देहरादून में खेल विभाग की उच्चस्तरीय बैठक के दौरान चर्चा करते हुए दिख रहे हैं।
देहरादून, 19 अगस्त 2026। ओलंपिक-2036 के लिए उत्तराखण्ड से प्रतिभावान खिलाड़ियों को तैयार करने की दिशा में राज्य सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने खेल विभाग के साथ बैठक कर प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को वैज्ञानिक आधार पर चयनित करने और व्यवस्थित प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं और प्रदेश की क्षमता तथा भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप खेलों की पहचान कर खिलाड़ियों को अभी से वैज्ञानिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड के पोटेंशियल के आधार पर खेलों का चयन किया जाए। ऐसे खेलों को प्राथमिकता दी जाए, जिनमें प्रदेश के खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि खेलों को प्राथमिकताओं में और आगे लाने की आवश्यकता है। इसके लिए विभाग को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर मिशन मोड में कार्य करना होगा।
प्रतिभाओं की पहचान के लिए मुख्य सचिव ने टैलेंट हंट जैसे कार्यक्रम व्यापक स्तर पर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चयनित खेलों में प्रतिभावान खिलाड़ियों की पहचान कर उनके लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। खिलाड़ियों के चयन के लिए रोबस्ट और वैज्ञानिक प्रणाली विकसित करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिभा का चयन पारदर्शी एवं वैज्ञानिक मानकों के आधार पर सुनिश्चित होना चाहिए।
मुख्य सचिव ने प्रारंभिक चरण में 100 से 150 प्रतिभावान बच्चों को चिह्नित कर उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए। इन बच्चों के लिए प्रो-एक्टिव होकर प्रशिक्षण, कोचिंग, फिटनेस और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
उन्होंने स्कूल स्तर से ही खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें तैयार करने पर भी विशेष जोर दिया। मुख्य सचिव ने कहा कि स्कूल एजुकेशन सिस्टम में खेलों को और प्रभावी ढंग से शामिल करने की आवश्यकता है। इसके लिए स्कूलों में कार्यरत पीटीआई के सेंसिटाइजेशन और ग्रूमिंग पर ध्यान दिया जाए, ताकि वे बच्चों की खेल प्रतिभा को पहचानने और उसे निखारने में प्रभावी भूमिका निभा सकें। साथ ही, स्कूलों में सकारात्मक खेल वातावरण विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने कहा कि खिलाड़ियों के साथ-साथ कोचों की क्षमता निर्माण भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने वर्तमान के प्रतिभावान खिलाड़ियों को अच्छे प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण दिलाकर भविष्य के लिए प्रशिक्षित कोच के रूप में तैयार करने की दिशा में कार्य किए जाने की बात कही। इससे प्रदेश में आने वाले समय में गुणवत्तापूर्ण कोचों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
बैठक में मुख्य सचिव ने बच्चों के चिन्हीकरण, कोच की उपलब्धता और प्रशिक्षण शुरू किए जाने की टाइमलाइन अभी से निर्धारित करने के निर्देश दिए। प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट लक्ष्य एवं समयसीमा तय कर इसकी नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि ओलंपिक-2036 को ध्यान में रखते हुए अभी से प्रतिभाओं को पहचानने, उन्हें वैज्ञानिक तरीके से तैयार करने और उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के लिए सक्षम बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने जरूरी हैं। उत्तराखण्ड में उपलब्ध खेल प्रतिभा को उचित मंच, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित की जा सकती है।
बैठक में विशेष प्रमुख सचिव श्री अमित सिन्हा, सचिव श्री शैलेश बगौली, डॉ. रणवीर सिंह चौहान एवं अपर सचिव श्रीमती नमामि बंसल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह बैठक सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग की ओर से 19 अगस्त 2026 को जारी की गई जानकारी के अनुसार आयोजित हुई।

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