हर साल 9 नवंबर का दिन उत्तराखंडवासियों के लिए गर्व और भावनाओं से भरा होता है। यह वही दिन है जब वर्ष 2000 में देश के 27वें राज्य के रूप में उत्तराखंड का गठन हुआ था। हिमालय की गोद में बसा यह सुंदर राज्य न केवल अपनी प्राकृतिक छटा के लिए जाना जाता है, बल्कि अपने समृद्ध इतिहास, धार्मिक आस्था और साहसी लोगों की परंपरा के लिए भी विख्यात है। यह अवसर न केवल राज्य की स्थापना का उत्सव है, बल्कि इसकी समृद्ध संस्कृति, अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और यहां के लोगों की अटूट भावना का भी सम्मान करता है। उत्तराखंड स्थापना दिवस राज्य की विशिष्ट पहचान, भारतीय विरासत में उसके योगदान और अलग राज्य के दर्जे के लिए चले लंबे संघर्ष की याद दिलाता है। हर वर्ष इस दिन नागरिक, छात्र और सांस्कृतिक संगठन मिलकर विभिन्न कार्यक्रमों, परेडों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से इस पर्व को मनाते हैं। लोग एक-दूसरे को उत्तराखंड स्थापना दिवस की शुभकामनाएं भेजते हैं और इस पावन अवसर पर राज्य की उपलब्धियों, विकास यात्रा और भविष्य की चुनौतियों पर विचार करते हैं।

उत्तराखंड का अस्तित्व वर्षों के संघर्ष और जनआंदोलनों के बाद संभव हो पाया। अलग राज्य की मांग कोई एक दिन की भावना नहीं थी, बल्कि यह पहाड़ की कठिन ज़िंदगी, पहचान और विकास से जुड़ी आकांक्षाओं का परिणाम थी। 1994 में चले व्यापक राज्य आंदोलन ने इस मांग को नई दिशा दी और आखिरकार 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तरांचल राज्य का गठन हुआ। बाद में 2007 में इसका नाम बदलकर “उत्तराखंड” कर दिया गया, जो इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप से अधिक अनुरूप था।

उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ कहा जाता है और यह उपाधि केवल उसके धार्मिक स्थलों के कारण नहीं, बल्कि उसकी पवित्रता और आध्यात्मिक गहराई के कारण भी है। यहां स्थित चार धाम,बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री यह हिंदू धर्म के चार प्रमुख तीर्थ हैं। जिनके दर्शन करना जीवन का सबसे पवित्र अनुभव माना जाता है। यही नहीं, गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों की उत्पत्ति भी इसी भूमि से होती है। प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख है कि यह वह स्थान है जहां देवताओं ने निवास किया और ऋषि-मुनियों ने गहन तपस्या की। इसलिए यह भूमि केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी महान मानी जाती है।

आज उत्तराखंड न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से, बल्कि पर्यटन और प्राकृतिक संपदाओं के मामले में भी अग्रणी है। बर्फ से ढकी पर्वत-श्रृंखलाएं, हरे-भरे जंगल, झरनों की कल-कल और लोकगीतों की मधुरता इस राज्य की आत्मा को जीवंत रखती हैं। उत्तराखंड का हर पर्व, हर लोककला, हर गीत अपनी मिट्टी की कहानी कहता है। फाउंडेशन डे के इस पावन अवसर पर उत्तराखंड अपने अतीत पर गर्व करता है और भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगाता है। यह केवल एक राज्य की स्थापना नहीं, बल्कि हिमालय की गोद में बसे लोगों की पहचान, संघर्ष और संस्कृति की अमर गाथा है। सचमुच, यह भूमि देवताओं की है, “देवभूमि उत्तराखंड।”

Updated On
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story