उज्जैन जमीन खरीद मामले में मोहन यादव परिवार पर आरोप, रिपोर्ट में दावा
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में उज्जैन में जमीन खरीद के दावे किए गए हैं, कांग्रेस ने विकास परियोजनाओं और हितों के टकराव पर सवाल उठाए हैं।

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 से जुड़ी विकास परियोजनाओं के बीच जमीन खरीद को लेकर इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट के दावों पर राजनीतिक चर्चा शुरू हुई।
Ujjain land controversy : उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर तेजी से हो रहे विकास कार्यों के बीच अब जमीन खरीद को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। धार्मिक नगरी उज्जैन में सड़कों, हाईवे, एक्सप्रेसवे और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के विस्तार के साथ रियल एस्टेट बाजार में भी तेजी आई है। इसी बीच अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने मुख्यमंत्री बनने के बाद उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में जमीन खरीदी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव के 13 दिसंबर 2023 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने उज्जैन क्षेत्र में कम से कम 137 प्लॉट खरीदे हैं। इन जमीनों का कुल क्षेत्रफल करीब 168 एकड़ बताया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनमें से कई जमीनें उन इलाकों में हैं, जहां आने वाले समय में सड़क परियोजनाएं, हाईवे कनेक्टिविटी और मास्टर प्लान के तहत विकास कार्य प्रस्तावित हैं।
उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण के बाद शहर की पहचान धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में और मजबूत हुई है। हर साल करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण यहां होटल, हॉस्पिटलिटी, रियल एस्टेट और व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी देखने को मिली है। इसी विकास की वजह से शहर के आसपास की जमीनों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है।
सीएम परिवार के नाम जमीन खरीद का दावा :
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सरकारी रिकॉर्ड के हवाले से दावा किया गया है कि ये जमीनें मुख्यमंत्री मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव, बेटे वैभव यादव की पत्नी शालिनी यादव, भाई नंदलाल यादव, नारायण यादव, नारायण की पत्नी रेखा यादव, उनके बेटे अभय यादव और चचेरे भाइयों गोविंद यादव तथा नीलेश यादव के नाम पर खरीदी गई हैं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री परिवार के पास कुल मिलाकर 245 प्लॉट हैं, जिनका क्षेत्रफल लगभग 335 एकड़ बताया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में शामिल आंकड़े अलग-अलग समय अवधि की जमीन खरीद पर आधारित हैं और वर्ष 2026 में हुई खरीद-बिक्री को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप :
रिपोर्ट सामने आने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर हमला तेज कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बनने के समय और उससे पहले के वर्षों में मुख्यमंत्री परिवार की जमीनों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी हुई।
कांग्रेस का दावा है कि वर्ष 2021 से 2023 के बीच मुख्यमंत्री के करीबी रिश्तेदारों के पास करीब 194 प्लॉट में फैली 253 एकड़ जमीन थी, जबकि बाद में यह आंकड़ा बढ़कर 245 प्लॉट और लगभग 335 एकड़ तक पहुंच गया।
कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया है कि जिन इलाकों में सरकार की विकास परियोजनाएं घोषित हुईं, उन्हीं क्षेत्रों में जमीन खरीद क्यों बढ़ी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मामले को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा और जांच की मांग उठाई।
सिंहस्थ परियोजनाओं और लैंड पूलिंग विवाद के बीच आरोप :
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को देखते हुए सरकार कई बड़े विकास प्रोजेक्ट शुरू कर रही है। इनमें नई सड़कें, हाईवे कनेक्टिविटी और शहर विस्तार से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं को लेकर पहले ही किसान संगठनों ने लैंड पूलिंग नीति का विरोध किया था।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लैंड पूलिंग को लेकर विरोध के दौरान मुख्यमंत्री परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने कई जमीनें खरीदीं। इनमें से करीब 62 प्लॉट लगभग 92 एकड़ क्षेत्र में होने का दावा किया गया है।
मास्टर प्लान और विकास योजनाओं पर सवाल :
उज्जैन मास्टर प्लान 2035 मई 2023 में जारी किया गया था। मुख्यमंत्री बनने से पहले मोहन यादव उज्जैन की विकास योजनाओं से जुड़े रहे हैं। वह वर्ष 2004 से 2010 तक उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे थे। इसके अलावा वर्ष 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष भी रहे।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार ने उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में कई सड़क और हाईवे परियोजनाओं की घोषणा की, जिससे इन क्षेत्रों में जमीन की मांग बढ़ी। कांग्रेस का आरोप है कि विकास योजनाओं और मास्टर प्लान में बदलाव का फायदा कुछ चुनिंदा लोगों को मिला। हालांकि, इन आरोपों पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बीजेपी की ओर से भी इस मामले में कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।
परिवार ने बताया निजी कारोबार :
मुख्यमंत्री के चचेरे भाई अनंत यादव ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि उनका परिवार लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार में है। उन्होंने कहा कि जमीन खरीदना और बेचना एक निजी कारोबारी गतिविधि है और केवल इस वजह से कारोबार बंद नहीं किया जा सकता कि परिवार का कोई सदस्य मुख्यमंत्री है। उन्होंने दावा किया कि उनका परिवार वर्ष 2010 से रियल एस्टेट क्षेत्र में सक्रिय है और जमीन से जुड़े सभी काम नियमों के अनुसार किए गए हैं।
बढ़ता राजनीतिक दबाव :
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच जमीन खरीद का यह मामला अब मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। जहां कांग्रेस इसे सत्ता और विकास परियोजनाओं से जुड़े सवालों के रूप में उठा रही है, वहीं मुख्यमंत्री परिवार ने इसे निजी कारोबार का मामला बताया है।
आने वाले समय में इस मामले को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है, क्योंकि उज्जैन का विकास और जमीनों की बढ़ती कीमतें दोनों ही राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दे बन चुके हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
