महिला आरक्षण पर उद्धव ठाकरे का बड़ा स्टैंड: विधेयक का किया समर्थन, लेकिन परिसीमन रोकने और 33% कोटा तुरंत लागू करने की रखी मांग। जानें संसद में क्या बोले पीएम मोदी।

Uddhav Thackeray on Women Reservation Bill 2026 : भारतीय राजनीति के केंद्र में इस समय 'महिला आरक्षण' का मुद्दा एक ऐसी धुरी बन चुका है, जिसके इर्द-गिर्द सत्ता पक्ष और विपक्ष की भविष्य की रणनीतियां घूम रही हैं। इसी राजनीतिक सरगर्मी के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए विधेयक पर पार्टी का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। राज्यसभा सांसद संजय राउत के माध्यम से सामने आए उनके बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि शिवसेना इस ऐतिहासिक कदम के पक्ष में खड़ी है, लेकिन साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की मंशा और इसे लागू करने की समयसीमा पर तीखे सवाल भी दागे हैं। उद्धव ठाकरे का कहना है कि महिला आरक्षण विधेयक, जो 2023 में ही संसद से पारित हो चुका है, उसे अब बिना किसी राजनीतिक हंगामे के 'तत्काल' प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए।

उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे को केवल एक कानून के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय एकता के चश्मे से देखा है। उन्होंने विशेष रूप से परिसीमन (Delimitation) के संवेदनशील मसले पर अस्थायी रोक लगाने की मांग उठाई है। उनके अनुसार, यह किसी एक दल के राजनीतिक भविष्य का विषय नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे के भविष्य का सवाल है। परिसीमन के कारण उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक संतुलन बिगड़ने की जो आशंकाएं जताई जा रही हैं, ठाकरे ने उसी ओर इशारा करते हुए इस पर और अधिक गहन चर्चा और विचार-विमर्श की आवश्यकता पर बल दिया है। वे चाहते हैं कि आरक्षण की प्रक्रिया में किसी भी क्षेत्र या राज्य के हितों के साथ समझौता न हो।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान इस क्षण को राष्ट्र के लिए एक 'मजबूत धरोहर' करार दिया है। प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपील की कि वे देश की आधी आबादी को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में लाने के इस सुनहरे अवसर को हाथ से न जाने दें। उन्होंने इसे लोकतंत्र की विकास यात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा बताते हुए कहा कि नेतृत्व की क्षमता वही है जो समय की मनोस्थिति को समझकर उसे इतिहास की अमानत बना दे। गौरतलब है कि इस विशेष सत्र का मुख्य एजेंडा महिला आरक्षण कानून को 2029 के आम चुनाव से पहले धरातल पर उतारना है, जिसके लिए लोकसभा की सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती है।

विधेयक के मसौदे के अनुसार, यह आरक्षण केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। हालांकि, सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन की प्रक्रिया ने एक नई संवैधानिक बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष जहाँ इसे चुनावी लाभ का जरिया बता रहा है, वहीं सरकार इसे 'नारी शक्ति' के सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम मान रही है। इस राजनीतिक खींचतान के बीच उद्धव ठाकरे का समर्थन और परिसीमन पर उनकी चिंताएं यह दर्शाती हैं कि आगामी दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस विधेयक को लेकर संघर्ष अभी और तेज होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार विपक्ष की इन मांगों और तकनीकी चुनौतियों का समाधान किस प्रकार निकालती है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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