Abhishek Banerjee ED questioning Lok Sabha Speaker : पिछले कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल की राजनीती से अनेकों घटनाए समाने आए है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी जब एक तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर में वित्तीय हेरफेर के गंभीर सवालों का सामना कर रहे थे। ऐसे में ही अब लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यालय की ओर से उन्हें महज दो घंटे के भीतर पेश होने का एक बेहद चौंकाने वाला और कड़ा नोटिस थमा दिया गया। इस दोहरे प्रशासनिक और कूटनीतिक वार ने टीएमसी नेतृत्व को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। सूत्रों के अनुसार, स्पीकर पहले दोनों पक्षों की बात सुनेंगे और सभी तथ्यों की समीक्षा करने के बाद ही अपना फैसला देंगे. यह मामला उस समय और अधिक चर्चा में आ गया, जब TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को स्पीकर कार्यालय की ओर से भेजे गए समन को लेकर विवाद खड़ा हो गया. TMC सूत्रों के मुताबिक, 15 जून को दोपहर 2 बजे स्पीकर कार्यालय ने अभिषेक बनर्जी को ईमेल भेजकर उसी दिन शाम 4 बजे मिलने के लिए बुलाया था।


प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में मचे इस असमंजस के बीच, ईमेल भेजे जाने के करीब एक घंटे बाद स्पीकर कार्यालय ने टीएमसी के एक अन्य वरिष्ठ सांसद कीर्ति आज़ाद से फोन पर संपर्क साधा और इस निर्धारित बैठक की आपातकालीन जानकारी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कीर्ति आजाद तुरंत हरकत में आए और खुद दौड़ते हुए सीधे लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद उच्च अधिकारियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराते हुए स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी इस समय ईडी की अत्यंत संवेदनशील जांच प्रक्रिया और पूछताछ में व्यस्त हैं, जिसके कारण उनका इस निर्धारित समय पर बैठक में शामिल होना व्यावहारिक रूप से असंभव है। इसके साथ ही कीर्ति आजाद ने स्पीकर कार्यालय से इस पूरी सुनवाई के लिए एक नई तारीख और समय आवंटित करने का लिखित अनुरोध किया और भरोसा दिलाया कि अभिषेक बनर्जी और पूरी तृणमूल कांग्रेस इस वैधानिक प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग करने के लिए पूरी तरह तैयार है।


इस पूरे विवाद के कानूनी और आधिकारिक पहलू देश के दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत बेहद पेचीदा हो चुके हैं। दरअसल, टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में अपने एक अलग गुट को मान्यता देने और किसी अन्य राजनीतिक दल में अपने आधिकारिक विलय को मंजूरी देने की मांग की है। इसी नाजुक अनुरोध पर अब लोकसभा अध्यक्ष को अपना अंतिम और संवैधानिक फैसला सुनाना है। जहां एक तरफ बागी सांसद तकनीकी दांव-पेंचों का सहारा लेकर अपने इस कदम को वैध और कानूनी रूप से सही साबित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी का मूल टीएमसी नेतृत्व इसे सीधे तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधि और विश्वासघात करार देते हुए इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग पर अड़ा है। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष इस गंभीर मामले में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में फैसला नहीं करेंगे और दोनों पक्षों के दस्तावेजों, तर्कों तथा कानूनी तथ्यों की गहन समीक्षा के बाद ही कोई कदम उठाएंगे।

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ केंद्रीय एजेंसी की इस त्वरित कार्रवाई और संसदीय सचिवालय के दो घंटे के नोटिस ने इस पूरे मामले को एक बड़े कानूनी और राजनीतिक युद्ध में तब्दील कर दिया है। 20 सांसदों के इस विद्रोह ने संसद के भीतर टीएमसी की ताकत और उसकी राष्ट्रीय साख पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का अगला कदम और इस कानूनी लड़ाई का परिणाम न केवल तृणमूल कांग्रेस का भविष्य तय करेगा, बल्कि देश में संसदीय लोकतंत्र और दल-बदल से जुड़े कानूनों के लिए भी एक नया और दूरगामी उदाहरण स्थापित करेगा, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।




Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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