स्पीकर ओम बिरला का TMC पर बड़ा फैसला; क्या ममता को TMC को बचाने का मिलेगा मौका ?
तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों द्वारा त्रिपुरा की क्षेत्रीय पार्टी में विलय की घोषणा के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने नेतृत्व को पक्ष रखने का समय दिया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी में उपजे आंतरिक संकट और सांसदों के इस्तीफे के बीच कोलकाता में एक जनसभा को संबोधित करती हुईं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी।
TMC split and rebellion 2026 : पश्चिम बंगाल की राजनीति से लेकर देश के संसदीय गलियारों तक इस वक्त एक अभूतपूर्व राजनीतिक भूचाल आया हुआ है, जिसने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडरा दिए हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के हाथों मिली करारी शिकस्त के बाद से ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के भीतर सुलग रही बगावत की चिंगारी अब एक भीषण ज्वालामुखी का रूप ले चुकी है। नौबत यहाँ तक आ पहुंची है कि संसद के दोनों सदनों को मिलाकर कभी चालीस सांसदों के भारी-भरकम कुनबे के साथ देश की मुख्य विपक्षी आवाजों में शुमार होने वाली तृणमूल कांग्रेस आज अपने इतिहास के सबसे बड़े बिखराव और दो-फाड़ होने की कगार पर खड़ी है। इस बेहद संवेदनशील और गंभीर राजनीतिक संकट के बीच, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूरे मामले में सीधा हस्तक्षेप करते हुए तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को नई दिल्ली में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक के लिए समन भेजा है। स्पीकर ओम बिरला ने अभिषेक बनर्जी को आगामी 19 जून को मिलने का समय दिया है, ताकि वह संसदीय मर्यादाओं के तहत पार्टी में जारी इस भीषण बगावत और तकनीकी टूट पर आधिकारिक तौर पर अपना पक्ष रख सकें और इस बेहद पेचीदा स्थिति को स्पष्ट कर सकें।
तृणमूल कांग्रेस के भीतर हुए इस विद्रोह का आकार इतना बड़ा है कि इसने राष्ट्रीय राजनीति के बड़े-बड़े धुरंधरों को चौंका दिया है। ममता बनर्जी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने एकमुश्त अलग होने और पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा की एक छोटी व पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी 'नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में अपने गुट के पूर्ण विलय का सनसनीखेज ऐलान कर दिया है। गौरतलब है कि साल 2022 में गठित हुई इस छोटी पार्टी का चुनावी रिकॉर्ड बेहद निराशाजनक रहा है और साल 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इसके द्वारा उतारे गए दोनों ही उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई थी, लेकिन तकनीकी रूप से दल-बदल विरोधी कानून की पेचीदगियों से बचने के लिए बागी धड़े ने इसी दल का दामन थामने का रणनीतिक फैसला किया है। इस पूरे घटनाक्रम में पर्दे के पीछे चल रही सियासी बिसात उस वक्त पूरी तरह बेपर्दा हो गई, जब बागी तृणमूल सांसदों का यह बड़ा गुट लोकसभा अध्यक्ष के पास औपचारिक अर्जी लगाने से ठीक पहले बागी सांसद शताब्दी रॉय की अगुवाई में वरिष्ठ बीजेपी नेता और पश्चिम बंगाल में पार्टी के चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव से गुपचुप मुलाकात करने पहुंचा।
संसदीय और कानूनी मोर्चे पर मचे इस घमासान के साथ-साथ तृणमूल को दूसरा सबसे बड़ा और आत्मघाती झटका देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा में लगा है, जहां से पार्टी के वरिष्ठ और दिग्गज चेहरों ने एक-एक कर इस्तीफों की झड़ी लगा दी है। बीते गुरुवार को ही प्रकाश चिक बराइक और कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से अपना आधिकारिक त्याग पत्र सौंप दिया। इस जोड़ी के इस्तीफे से ठीक पहले, पार्टी के अत्यंत कद्दावर नेता सुखेंदु शेखर रॉय और असम से ताल्लुक रखने वाली महिला सांसद सुष्मिता देव ने भी संसद सदस्य के पद को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था। पद छोड़ने के बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने तृणमूल के शीर्ष नेतृत्व और उसके कामकाज के तौर-तरीकों पर बेहद गंभीर नैतिक और राजनीतिक सवाल खड़े किए। उन्होंने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए जघन्य दुष्कर्म और हत्या मामले के बाद उपजे जनआक्रोश और पार्टी के ढुलमुल रवैये को देखकर ही उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को छोड़ने का अंतिम मन बना लिया था। वहीं, सुष्मिता देव ने पार्टी से अलग होने की वजह अपने गृह राज्य असम की सक्रिय क्षेत्रीय राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने को बताया है। कूटनीतिक और कानूनी नजरिए से देखा जाए तो 19 जून को होने वाली ओम बिरला और अभिषेक बनर्जी की यह मुलाकात न केवल बागी सांसदों की अयोग्यता या विलय की वैधता को तय करेगी, बल्कि यह भी तय कर देगी कि देश के राजनीतिक पटल पर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का दबदबा कायम रहेगा या वह इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
