वरिष्ठ गीतकार एवं पटकथा लेखक Javed Akhtar ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब सिर्फ एक तकनीकी संभावना नहीं, बल्कि हमारी वास्तविकता का हिस्सा बन चुकी है। हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने विस्तार से बताया कि इस बदलाव को अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि विज्ञान एवं तकनीक की गति को रोकना संभव नहीं है। “जब चला जलता, रेल इंजन और मोटर वाहन भी हुईं, लोगों ने विरोध किया था… लेकिन विज्ञान बुराई नहीं है, यह आगे बढ़ेगा।”


इस बीच, उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई वर्तमान रूप में हालांकि एक सक्षम उपकरण है, लेकिन रचनात्मक चिंतन, भावनात्मक गहराई और अनुभव‑आधारित कला में अभी उसकी जगह नहीं ले सकती। “कल पाँच या दस सालों में भिन्न हो सकती है, लेकिन आज यह सिर्फ सहायक या सचिव की भूमिका में है।” वरिष्ठ साहित्यकार ने यह भी कहा कि एआई की शक्ति मूलतः डेटा पर निर्भर करती है “यह दिया गया डेटा उपयोग करती है, और डेटा हम देते हैं। हमें तय करना है कि कितना हिस्सा हम देना चाहते हैं।”


इस संदर्भ में उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि अब हमें विचार करना होगा कि कैसे इस ताकत का उपयोग हमारे पक्ष में किया जा सके, न कि इसके विरोध में खड़े होने का। जहाँ तक अधिकार‑कानून का सवाल है, अख्तर ने पहले भी रचनाकारों के अधिकारों एवं कॉपीराइट सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा था कि रचनात्मक लेखन सिर्फ आंकड़ों पर आधारित नहीं हो सकता, बल्कि उसमें मानव चेतना व अवचेतन का योगदान होता है, जो मशीनें अभी हासिल नहीं कर सकतीं।


अख्तर ने अपनी बात अंतिम रूप से इस विचार के साथ कही कि यह जो दौर हम देख रहे हैं, वह केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं बल्कि सांस्कृतिक उथल‑पुथल का संकेत है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ आज का सवाल नहीं है, यह अगले पीढ़ी का सवाल है, आने वाली पीढ़ी को इस एआई‑उम्र में वास्तविक चुनौती का सामना करना पड़ेगा।”


जब एक ऐसे सृजनशील व्यक्तित्व ने जो हिंदी सिनेमा, गीत‑साहित्य और संवाद‑लेखन के क्षेत्र में दशकों तक सक्रिय रहा है, इस तरह से चेतावनी दी हो कि बदलाव अपरिहार्य हैं और हमारी मानव‑कला को नया स्वरूप तलाशना होगा, तो यह सिर्फ मंत्रीबद्ध टिप्पणी नहीं बल्कि एक संकेत‑चिन्ह है कि कला, तकनीक और समाज‑संस्कृति के बीच नया समीकरण बनने जा रहा है। एआई अब सिर्फ तकनीकी चर्चा नहीं, बल्कि सामाजिक‑सांस्कृतिक विमर्श का हिस्सा बन चुकी है।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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