नई दिल्ली। देश के लोकतंत्र का एक और अहम पर्व- संसद का 'Winter Session' 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर 2025 तक चलेगा। यह सत्र न केवल संसद के वार्षिक विधायी कैलेंडर का अंतिम अध्याय है, बल्कि नीतिगत चर्चाओं, विधेयकों और जनहित से जुड़े फैसलों का भी केंद्र बिंदु माना जाता है। हर साल की तरह इस वर्ष भी यह सत्र राष्ट्र के राजनीतिक वातावरण में नई ऊर्जा लेकर आने वाला है।

शीतकालीन सत्र संसद के तीन प्रमुख सत्रों में से एक है, जो सामान्यतः नवंबर या दिसंबर में आयोजित किया जाता है। इस सत्र का उद्देश्य उन विधेयकों को पारित करना और उन नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करना होता है जो वर्ष के बाकी दो सत्रों, बजट और मानसून सत्र के दौरान लंबित रह जाते हैं। इस बार का सत्र 19 दिनों तक चलेगा, जिसमें दोनों सदनों में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार होने की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष के शीतकालीन सत्र में संविधान संशोधन, राष्ट्रीय सुरक्षा, कृषि सुधार, डिजिटल नीतियों और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा की जा सकती है। साथ ही कुछ ऐसे विधेयक भी पेश किए जा सकते हैं जिनका सीधा असर जनता के दैनिक जीवन पर पड़ने वाला है। इस बार भी प्रश्नकाल, शून्यकाल और लघु अवधि चर्चाओं के माध्यम से सांसद सरकार से जवाबदेही तय करेंगे।

जहां तक उपस्थिति की बात है, संसद का शीतकालीन सत्र देश के सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों, यानी लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों की उपस्थिति में आयोजित होता है। इसमें मंत्रिपरिषद के सदस्य, राज्यसभा के मनोनीत सदस्य, और विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी भी शामिल होते हैं। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही सत्र का औपचारिक उद्घाटन होता है, और संसद की कार्यवाही इसी अधिसूचना के तहत शुरू होती है।

राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2025 के अंत में कई राज्यों के विधानसभा चुनाव और अगले वर्ष के आम चुनावों की तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे में सरकार और विपक्ष दोनों ही, इस मंच का इस्तेमाल अपने-अपने जनादेश को मजबूत करने के लिए करेंगे। विपक्षी दल जहां सरकार से सवालों की बौछार करेंगे, वहीं सत्ता पक्ष अपनी नीतियों की उपलब्धियों को जनता तक पहुँचाने का प्रयास करेगा।

समापन की ओर देखें तो, संसद का शीतकालीन सत्र सिर्फ विधेयकों के पारित होने का माध्यम नहीं, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की संवादात्मक शक्ति का प्रतीक है। जब देश की जनता वर्ष के अंत में अपनी नीतियों, योजनाओं और सुधारों का मूल्यांकन करती है, तब संसद का यह सत्र लोकतंत्र की उस जीवंत धारा को दिशा देता है, जो भारत को निरंतर प्रगतिशील बनाती है। इस बार का सत्र भी निश्चित रूप से ऐसे फैसलों की गवाही देगा, जो आने वाले वर्षों के लिए नीतिगत नींव रखेंगे।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story