उत्तराखंड में चार धाम यात्रा को सुगम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई चार धाम रोड परियोजना (Char Dham Road Project) ने हाल ही में गंगोत्री मार्ग के विस्तार को लेकर पर्यावरणविदों और स्थानीय समुदायों में चिंता पैदा कर दी है। यह परियोजना चार प्रमुख तीर्थस्थलों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को बेहतर और साल भर सुरक्षित सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए शुरू की गई थी। लेकिन हालिया सड़क चौड़ीकरण और अवसंरचना विकास ने इस संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरणीय संकट के खतरे को बढ़ा दिया है।

इस परियोजना के तहत उत्तरकाशी से गंगोत्री तक के मार्ग का कई हिस्सों में चौड़ीकरण और उन्नयन किया जा रहा है। विशेष रूप से भगीरथी नदी के पास के क्षेत्र में 20.6 किलोमीटर लंबी सड़क चौड़ीकरण की योजना को हाल ही में मंजूरी मिली है। इस योजना के तहत वन भूमि को गैर-वन उपयोग के लिए आवंटित किया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि यह कदम तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और यात्रा के सुगम अनुभव के लिए आवश्यक है, लेकिन विशेषज्ञ इस पर गंभीर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

गंगोत्री मार्ग के विस्तार को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर है। प्रमुख चिंताएं निम्नलिखित हैं:

1. वनों की कटाई और जैव विविधता का नुकसान:

सड़क चौड़ीकरण के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाने हैं। विशेष रूप से देodar, ओक और रोडोडेंड्रॉन जैसी हिमालयी प्रजातियाँ संकट में हैं। पेड़ों और वनस्पतियों की कटाई से जैव विविधता प्रभावित होगी और स्थानीय जीव-जंतु अपने प्राकृतिक आवास खो सकते हैं।

2. भूस्खलन, मिट्टी कटाव और ढलान अस्थिरता:

हिमालय की ढलानें भूस्खलन और अस्थिर मिट्टी के लिए संवेदनशील हैं। सड़क चौड़ीकरण के दौरान ढलानों की कटाई और निर्माण कार्य से भूस्खलन की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा ढलान पर अवसंरचना निर्माण से मानसून और ग्लेशियल पिघलन के दौरान खतरा दोगुना हो जाता है।

3. नदियों और जल प्रणाली पर प्रभाव:

गंगोत्री मार्ग भगीरथी नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के करीब है। सड़क निर्माण, मलबा डालना और बढ़ती मानव गतिविधि नदी की धारा, जलप्रवाह और भूजल स्तर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इससे बाढ़, फलेश फ्लड और नदी तट का अपरिवर्तनीय क्षरण हो सकता है।

हाल के वर्षों में, भूस्खलन और अचानक बाढ़ की घटनाओं ने परियोजना की संवेदनशीलता को उजागर किया है। पर्यावरण विशेषज्ञ और स्थानीय निवासी चेतावनी दे रहे हैं कि अनियंत्रित सड़क निर्माण और वन भूमि का अवैध उपयोग आपदा के खतरे को बढ़ा सकता है। इस परियोजना के पीछे एक गहरा संघर्ष है विकास और हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी तथा स्थानीय जीवनशैली के बीच। समर्थक तर्क देते हैं कि सड़क सुविधा तीर्थयात्रियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि आलोचक इसे दीर्घकालिक पर्यावरणीय असंतुलन और आपदा जोखिम के रूप में देखते हैं।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि परियोजना में पर्यावरण संरक्षण उपायों का पालन किया जा रहा है। हालांकि, कुछ हिस्सों में पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है। विशेष रूप से भगीरथी संवेदनशील क्षेत्र में वन भूमि का उपयोग और सड़क निर्माण विवादास्पद रहे हैं। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) और पर्यावरण विशेषज्ञ इस पर नजर बनाए हुए हैं।

गंगोत्री हाईवे परियोजना न केवल तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उत्तराखंड के विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। फिर भी, हिमालय की पारिस्थितिकी की संवेदनशीलता और संभावित आपदाओं के मद्देनजर परियोजना का हर कदम सावधानी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उठाना आवश्यक है। यह परियोजना हिमालय में विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन की परीक्षा के रूप में उभर रही है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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