मध्य प्रदेश, जिसे देश का “सोयाबीन कटोरा” कहा जाता है, इस बार अपनी सोयाबीन फसल को लेकर गहरी चिंताओं में है। राज्य के कई जिलों में अचानक हुई भारी बारिश, फसल रोगों का प्रकोप और मंडी में मिल रहे कम दाम ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक किसान जिन उम्मीदों के साथ इस फसल के लिए काम में जुटे थे, वह अब धूल‑धूसरित नजर आ रही है।


राज्य सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए समाधान की दिशा में कदम भी उठाए हैं। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹5,328 प्रति क्विंटल पर बेचने की अनुमति देने के साथ‑साथ, अगर मंडी में दाम MSP से नीचे जाएँ तो अंतर का भुगतान करने के लिए ‘भवंतर’ योजना लांच की गई है। इसके अंतर्गत किसानों का पंजीकरण शुरू हो चुका है, और बिक्री के बाद बैंक खाते में अंतर राशि डीबीटी के ज़रिए भेजी जाएगी।


वहीं, खेतों में रोग‑कीट और मौसम के कारण उपज में गिरावट सामने आई है। उदाहरण के लिए राज्य के कई हिस्सों में “येलो मोज़ाइक” नामक वायरस ने सोयाबीन के पौधों को प्रभावित किया है, जिससे किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे। कुछ जिलों में किसानों का कहना है कि एक एकड़ में मिलने वाला उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में बहुत कम रह गया है।


इन चुनौतियों के बीच, मौजूदा सिचुएशन किसान‑आय और राज्य‑वैधानिक कृषि नीतियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत बन चुकी है। यदि जल्द ही प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो मध्य प्रदेश की सोयाबीन‑उत्पादन में अग्रणी स्थिति पर सवाल उठ सकते हैं।


इस प्रकार, मध्य प्रदेश में सोयाबीन किसानों को फसल सुरक्षा, वितरण और मूल्य सुनिश्चितता—तीनों स्तर पर समर्थन की तत्काल आवश्यकता है। सरकार द्वारा योजनाओं का क्रियान्वयन जितनी जल्दी होगा, किसानों की परेशानियाँ उतनी ही बेहतर ढंग से कम हो सकेंगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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