10 MPs oath in Rajya Sabha : भारतीय लोकतंत्र के मंदिर यानी संसद भवन के उच्च सदन में गुरुवार को एक नया और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया। देश के विभिन्न कोनों और अनगिनत संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 10 नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित दिग्गजों ने राज्यसभा सांसद के रूप में औपचारिक रूप से शपथ ग्रहण की। संसद परिसर में आयोजित इस गरिमामय और भव्य समारोह में जब अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं की गूंज सुनाई दी, तो वहां उपस्थित हर कोई देश की इस भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को देखकर अभिभूत हो उठा। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने बेहद औपचारिक और गरिमापूर्ण माहौल के बीच सभी नए सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ और प्रतिज्ञान दिलाया, जिसके बाद ये सभी माननीय अब आधिकारिक रूप से सदन की विधायी कार्यवाही का हिस्सा बनने के पात्र हो गए हैं।

इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह की सबसे बड़ी और खूबसूरत विशेषता भारतीय लोकतंत्र की बहुभाषी परंपरा का सजीव नजारा रही। देश की संप्रभुता और संविधान के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए 10 में से पांच माननीय सदस्यों ने राष्ट्रभाषा हिंदी में पद की शपथ ली। वहीं, भाषाई गौरव को आगे बढ़ाते हुए तीन सदस्यों ने तेलुगु, एक सदस्य ने तमिल और एक अन्य सदस्य ने अंग्रेजी भाषा में पूरी निष्ठा के साथ अपना प्रतिज्ञान पढ़ा। इस अनोखे संगम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारतीय संविधान के तहत हर भाषा और क्षेत्र को बराबर का सम्मान प्राप्त है। उच्च सदन की सदस्यता ग्रहण करने वाले इन प्रमुख नेताओं में प्रवीण चक्रवर्ती, देबाशीष सामंतराय, सना सतीश बाबू, विजय चिंतकायाला, भाष्यम राम कृष्ण, लिंगामनेनी रमेश, राजेश परमानंद शुक्ला, बैद्यनाथ राम, परिमल नथवानी और ताई टागाक जैसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं।

अगर भौगोलिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की बात करें, तो इस बार आंध्र प्रदेश का पलड़ा काफी भारी नजर आया, जहां से सबसे अधिक चार सदस्य निर्वाचित होकर उच्च सदन की दहलीज तक पहुंचे हैं। वहीं, खनिज संपदा से भरपूर झारखंड राज्य से दो नेताओं ने राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण की। इनके अलावा सुदूर पूर्व के राज्य अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम में गुजरात, दक्षिण में तमिलनाडु और पूर्वी तट के ओडिशा राज्य से भी एक-एक सदस्य ने संसद में कदम रखा। इस संतुलित क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के कारण अब संसद के उच्च सदन में इन राज्यों की स्थानीय समस्याओं और विकास कार्यों की आवाज को पहले से कहीं ज्यादा मजबूती और नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

संवैधानिक नियमों के तहत आयोजित हुए इस विशेष कार्यक्रम के दौरान व्यवस्था और कानून की सर्वोच्चता को भी पूरी शिष्टता से बनाए रखा गया। इस पूरे विहंगम दृश्य और महत्वपूर्ण परंपरा के गवाह बनने के लिए खुद केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समारोह में विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी, संसद के कई वरिष्ठ सदस्य और राज्यसभा सचिवालय के शीर्ष स्तर के अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। भारतीय लोकतंत्र की यह संवैधानिक परंपरा जनप्रतिनिधियों को सीधे तौर पर देश की जनता की आकांक्षाओं और हितों के प्रति जवाबदेह बनाती है। जानकारों का मानना है कि नए और अनुभवी चेहरों के इस मिलाजुला रूप से आने वाले सत्रों में राज्यसभा के भीतर राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं को एक बिल्कुल नया और सकारात्मक दृष्टिकोण मिलने वाला है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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