तमिलनाडु विधानसभा में महासंग्राम; जानें क्यों सदनीय करवाई के बिच विपक्ष ने किया वॉकआउट
तमिलनाडु विधानसभा में सीएम विजय का शक्ति प्रदर्शन। डीएमके के वॉकआउट और एआईएडीएमके के विरोध के बीच टीवीके सरकार का फ्लोर टेस्ट। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

मुख्यमंत्री विजय तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश करने के दौरान सदन को संबोधित करते हुए
Tamil Nadu Floor Test 2026 : दक्षिण भारत की राजनीति में आज एक नया अध्याय लिखा जा रहा है क्योंकि 'थलापति' विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा का क्षण आ गया है। तमिलनाडु की सियासत के केंद्र बिंदु सेंट जॉर्ज फोर्ट में बुधवार, 13 मई की सुबह 9:30 बजे से गहमागहमी शुरू हुई, जहाँ नवगठित तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार को सदन के पटल पर अपना बहुमत सिद्ध करना है। 234 सीटों वाली विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी टीवीके के लिए यह राह इतनी आसान नहीं दिख रही है, क्योंकि गठबंधन की बैसाखियों पर टिकी इस सरकार को बहुमत के जादुई आंकड़े 118 को छूने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सदन का माहौल तब गरमा गया जब विपक्ष के नेता और डीएमके विधायक उदयनिधि स्टालिन ने कड़े तेवर अपनाते हुए विश्वास मत सत्र के बहिष्कार का ऐलान कर दिया। उदयनिधि स्टालिन ने सरकार की वैधता पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि राज्य की 66 प्रतिशत जनता ने टीवीके को वोट नहीं दिया है, इसलिए उनकी पार्टी इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेगी। इसके तुरंत बाद उदयनिधि स्टालिन और ओ. पन्नीरसेल्वम के नेतृत्व में डीएमके विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। वहीं दूसरी ओर, एआईएडीएमके के दिग्गज नेता एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी सरकार के विरोध में वोट करेगी, जिससे सत्ता पक्ष की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
सियासी उठापटक के बीच सरकार को ज्योतिषी रथिन पांडे की ओएसडी के रूप में नियुक्ति को लेकर भी तीखी आलोचना झेलनी पड़ रही है। डीएमडीके की महासचिव प्रेमलता विजयकांत ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए मुख्यमंत्री की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम), वीसीके और आईयूएमएल जैसी पार्टियों ने टीवीके सरकार को अपना समर्थन जारी रखा है। इन दलों का तर्क है कि वे तमिलनाडु में किसी भी संभावित राज्यपाल शासन को रोकने के लिए सरकार के साथ खड़े हैं।
इस महत्वपूर्ण फ्लोर टेस्ट के कानूनी पहलुओं की बात करें तो मद्रास उच्च न्यायालय के एक ताजा आदेश ने टीवीके खेमे में थोड़ी चिंता जरूर पैदा की है। अदालत ने तिरुपत्तूर से टीवीके विधायक श्रीनिवासन सेतुपति को विश्वास मत की वोटिंग प्रक्रिया में भाग लेने से रोक दिया है, जिससे सत्ता पक्ष की प्रभावी संख्या में एक और कमी आई है। इससे पहले, तिरुची ईस्ट सीट से इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री विजय की अपनी संख्या भी घटकर 107 रह गई थी। वर्तमान में जे.सी.डी. प्रभाकर विधानसभा अध्यक्ष के रूप में निष्पक्षता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि रविशंकर उपाध्यक्ष के तौर पर सदन का संचालन देख रहे हैं।
आज का यह फ्लोर टेस्ट केवल एक सांख्यिकीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह थलापति विजय के राजनीतिक कौशल और उनके गठबंधन की स्थिरता का निर्णायक प्रमाण होगा। यदि विजय इस बाधा को पार कर लेते हैं, तो यह उनके 'तमिलगा वेत्री कझगम' के लिए एक ऐतिहासिक जीत होगी, लेकिन विपक्ष की एकजुट घेराबंदी और डीएमके का वॉकआउट यह संकेत दे रहा है कि तमिलनाडु की राह आने वाले समय में राजनीतिक संघर्षों से भरी रहेगी। पूरे देश की निगाहें अब विधानसभा के परिणामों पर टिकी हैं, जो राज्य के भविष्य की दिशा तय करेंगे।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
