नोएडा में सिस्टम की लापरवाही ने ली युवक की जान: दो घंटे तक मदद की गुहार लगाता रहा सॉफ्टवेयर इंजीनियर, गड्ढे में डूबने से मौत
नोएडा सेक्टर 150 में दिल दहला देने वाला हादसा! घने कोहरे के कारण सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के गहरे पानी भरे गड्ढे में गिरी। 2 घंटे तक मदद की गुहार लगाने के बाद डूबने से हुई मौत। सीएम योगी ने दिए SIT जांच के आदेश, बिल्डर गिरफ्तार और नोएडा अथॉरिटी के सीईओ का तबादला। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

नोएडा | 25 जनवरी, 2026 धुंध के बीच चीखती रही जिंदगी, सोता रहा प्रशासन: एक अधूरे प्रोजेक्ट का खूनी गड्ढा बना युवराज की कब्र
नोएडा के सेक्टर 150 से एक ऐसी रूहकँपा देने वाली घटना सामने आई है जिसने शहरी विकास और सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। टाटा यूरेका पार्क में रहने वाले 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की एक जलमग्न गड्ढे में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। सबसे विचलित करने वाली बात यह रही कि युवराज लगभग दो घंटे तक मलबे और पानी के बीच जिंदगी की जंग लड़ते रहे और मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती और संसाधनों के अभाव ने अंततः एक होनहार जीवन का दीपक बुझा दिया।
हादसे का घटनाक्रम: मौत का वह सन्नाटा और कोहरे का पहरा
यह भयावह घटना 17 जनवरी की रात उस समय हुई जब नोएडा घने कोहरे की चादर में लिपटा हुआ था। युवराज मेहता अपनी कार से घर लौट रहे थे, तभी सेक्टर 150 में एक निर्माणाधीन साइट के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर एक क्षतिग्रस्त दीवार को तोड़ते हुए 30 से 70 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरी।
- खूनी गड्ढा: यह गड्ढा एक रुके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए खोदा गया था, जो बारिश के पानी से लबालब भरा हुआ था।
- मदद की कोशिश: युवराज के पिता राजकुमार सूचना मिलते ही मौके पर पहुँच गए। एक फ्लिपकार्ट डिलीवरी एजेंट ने भी अपनी जान जोखिम में डालकर गड्ढे में छलांग लगाई, लेकिन अँधेरा और कड़ाके की ठंड रेस्क्यू में बाधा बनी रही।
- देर से पहुंची मदद: कोहरे की सघनता और गड्ढे से निकली लोहे की नुकीली छड़ों (Rods) के कारण बचाव दल को युवराज तक पहुँचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। सुबह 4:30 बजे जब उन्हें बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और आधिकारिक कार्रवाई
युवराज की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण 'पानी में डूबने' (Drowning) और अत्यधिक सदमे के कारण 'कार्डियक अरेस्ट' (Cardiac Arrest) बताया गया है। इस घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश में जनाक्रोश पैदा कर दिया, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का कड़ा संज्ञान लिया।
प्रमुख कानूनी और आधिकारिक कदम:
- SIT जांच के आदेश: मुख्यमंत्री ने मामले की गहराई से जांच के लिए 'विशेष जांच दल' (SIT) का गठन किया है।
- प्रशासनिक गाज: लापरवाही के आरोप में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ (CEO) का तत्काल तबादला कर दिया गया है और संबंधित जूनियर इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
- बिल्डरों पर शिकंजा: संबंधित बिल्डर प्रोजेक्ट के मालिकों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तारियां की गई हैं।
लापरवाही की कीमत और एक गहरा सबक
युवराज मेहता की मौत केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की वह विफलता है जहाँ नागरिकों की सुरक्षा को बिल्डरों के मुनाफे और अधिकारियों की सुस्ती के आगे गौण मान लिया गया। स्थानीय निवासियों ने इस असुरक्षित साइट के बारे में पहले भी कई शिकायतें की थीं, जिन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो आज एक पिता को अपने जवान बेटे का शव नहीं उठाना पड़ता। क्या युवराज को न्याय मिलेगा? यह अब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और कानूनी प्रक्रिया की गति पर निर्भर करता है।

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