सैलानियों के लिए बड़ी खुशखबरी; मोदी सरकार ने देश को दिए 75 नए टूरिस्ट प्रोजेक्ट्स
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत देश भर में पर्यटन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए वित्तीय निवेश किया गया है।

भारत में बुनियादी ढांचे के विकास के बाद एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल पर घूमते हुए पर्यटक, जहां स्वदेश दर्शन योजना के तहत कनेक्टिविटी और सुविधाओं को बेहतर किया गया है।
Swadesh Darshan Scheme 75 Projects Completed : भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक खूबसूरती को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना ने धरातल पर इतिहास रच दिया है। देश के पर्यटन परिदृश्य को पूरी तरह बदलने के संकल्प के साथ शुरू की गई 'स्वदेश दर्शन योजना' का पहला चरण अपनी अभूतपूर्व सफलता के साथ पूर्णता की ओर बढ़ रहा है। सरकार के इस दूरदर्शी प्रयास के तहत देश भर के 15 चिन्हित पर्यटक सर्किटों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के भारी-भरकम निवेश के साथ स्वीकृत की गई 76 परियोजनाओं में से 75 परियोजनाएं भौतिक रूप से पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी हैं। बुनियादी ढांचे के इस कायाकल्प ने न केवल देश में आने वाले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सैलानियों के लिए यात्रा सुगमता को बढ़ाया है, बल्कि भारत के आर्थिक और क्षेत्रीय विकास के पहिये को भी एक नई और तेज रफ्तार दे दी है।
दरअसल, किसी भी गंतव्य की यात्रा का वास्तविक और सुखद अनुभव एक पर्यटक के वहां पहुंचने से बहुत पहले ही शुरू हो जाता है। इसी दर्शन को केंद्र में रखकर सरकार ने खंडित और छोटे हस्तक्षेपों की पुरानी परिपाटी को छोड़ते हुए वर्ष 2014 में 'स्वदेश दर्शन' और 'प्रसाद' (PRASHAD) जैसी एकीकृत योजनाओं की नींव रखी थी। सड़कों की सुगम कनेक्टिविटी, सार्वजनिक स्थानों की सुलभता, गुणवत्तापूर्ण ठहरने की व्यवस्था और आधुनिक सुविधाओं के विकास ने भारत के पर्यटन दृष्टिकोण में एक युगांतरकारी बदलाव को जन्म दिया है। इस सफलता की गति को और अधिक विस्तार देते हुए वर्ष 2022 में 'स्वदेश दर्शन 2.0' का आगाज किया गया, जिसका मुख्य ध्यान अनुभव-आधारित और टिकाऊ (सस्टेनेबल) पर्यटन पर केंद्रित है। इसके तहत गंतव्यों को ऐसे इमर्सिव पर्यटन केंद्रों में बदला जा रहा है जहां सैलानी स्थानीय संस्कृति को गहराई से महसूस कर सकें; जैसे उत्तराखंड की प्रसिद्ध टिहरी झील के चारों ओर तैरती हुई विशिष्ट 'लॉग हट्स' का निर्माण और हरियाणा के ऐतिहासिक कुरुक्षेत्र में महाभारत काल पर आधारित विषयगत आकर्षणों का विकास, जो पर्यटकों को जीवंत कहानी और सांस्कृतिक व्याख्या से मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।
इस महापरियोजना का एक अत्यंत प्रभावशाली पहलू भारत का जीवंत आध्यात्मिक पर्यटन क्षेत्र है, जो हर साल देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। आस्था की ये यात्राएं न केवल आध्यात्मिक चेतना को गहरा करती हैं, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों, छोटे उद्यमियों और आजीविका के साधनों को संबल देकर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की मुख्य रीढ़ साबित होती हैं। इस परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करते हुए 'प्रसाद योजना' के माध्यम से देश भर में 1700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 54 परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई है। इन एकीकृत विकास कार्यों के चलते सोमनाथ, श्रीशैलम और उत्तर प्रदेश के पवित्र गोवर्धन जैसे अत्यधिक फुटफॉल वाले पावन आध्यात्मिक स्थलों पर तीर्थयात्रियों की सुविधा, सुलभ पहुंच और सुरक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार दर्ज किया गया है।
आधिकारिक और बजटीय नीति के स्तर पर भी पर्यटन विकास को अब देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और समावेशी आर्थिक विकास के साथ मजबूती से जोड़ दिया गया है। हाल ही में घोषित केंद्रीय बजट में प्रतिष्ठित पर्यटन केंद्रों के रखरखाव और विकास के लिए किए गए विशेष वित्तीय प्रावधानों ने इस अभियान को और सुदृढ़ किया है। पूर्वोत्तर राज्यों की अपार पर्यटन क्षमता को दुनिया के सामने लाने, ग्रामीण परिवेश में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और 'पूर्वोदय' राज्यों की विकासात्मक आकांक्षाओं को गति देने में पर्यटन विभाग एक सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। बुनियादी ढांचे पर किया गया यह भारी निवेश न केवल देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासतों को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित कर रहा है, बल्कि रोजगार सृजन और उभरते हुए पर्यटन क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों तक सीधा आर्थिक लाभ पहुंचाकर क्षेत्रीय संतुलन को साधने का सबसे बड़ा जरिया बन गया है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
