बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की, अब मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे निकले।

Suvendu Adhikari vs Mamata Banerjee 2026 : पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में साल 2026 एक ऐसे मोड़ के रूप में दर्ज हो गया है, जिसने सत्ता के समीकरणों को पूरी तरह पलट कर रख दिया है। भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद अब गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी को लेकर है, जिन्होंने इस चुनाव में 'महारथी' की भूमिका निभाते हुए दो अलग-अलग विधानसभा सीटों—भवानीपुर और नंदीग्राम—से ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। ममता बनर्जी के अभेद्य दुर्ग माने जाने वाले भवानीपुर में टीएमसी प्रमुख को पटखनी देने और नंदीग्राम में अपने वर्चस्व को बरकरार रखने के बाद शुभेंदु अधिकारी अब बंगाल के नए मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे प्रबल दावेदार बनकर उभरे हैं। हालांकि, इस शानदार सफलता ने उनके सामने एक संवैधानिक पेच भी फंसा दिया है कि वह आखिर किस सीट का प्रतिनिधित्व करेंगे और किसे छोड़ेंगे।

नंदीग्राम की रणभूमि, जिसे बंगाल की सत्ता का प्रवेश द्वार माना जाता है, वहां शुभेंदु अधिकारी ने एक बार फिर अपनी पकड़ साबित की है। उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार पवित्र कर को 9,665 वोटों के कड़े अंतर से शिकस्त दी। आंकड़ों के दर्पण में देखें तो शुभेंदु को कुल 1,27,301 मत प्राप्त हुए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी पवित्र कर 1,17,636 वोटों पर सिमट गए। यह वही नंदीग्राम है जिसने 2021 में ममता बनर्जी को करीब 2,000 वोटों से हराकर राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया था। 2026 के इन नतीजों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि नंदीग्राम का जनादेश प्रदेश की दिशा तय करने में आज भी निर्णायक भूमिका निभाता है।

लेकिन असली 'सियासी मास्टरस्ट्रोक' भवानीपुर में देखने को मिला, जिसे नंदीग्राम का पार्ट-2 कहा जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके अपने ही गढ़ में 15,000 से अधिक मतों के भारी अंतर से पराजित किया। 2011 से तृणमूल कांग्रेस का सुरक्षित किला रही भवानीपुर सीट पर 29 अप्रैल को हुए मतदान के परिणाम ने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है। 2021 में नंदीग्राम से हारने के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर अपनी कुर्सी बचाई थी, लेकिन इस बार शुभेंदु ने चुनाव से पहले ही भवानीपुर से लड़ने की जो चुनौती दी थी, उसे 4 मई की शाम हकीकत में बदलकर टीएमसी के इस अंतिम किले को भी ढहा दिया।

संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत, दो सीटों से जीत हासिल करने वाले किसी भी जनप्रतिनिधि को 14 दिनों के भीतर एक सीट खाली करनी होती है। राजनीतिक गलियारों में यह प्रबल संभावना जताई जा रही है कि शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम की सीट छोड़ सकते हैं और भवानीपुर से विधायक बने रह सकते हैं। इसके पीछे का मुख्य तर्क यह है कि भवानीपुर में उनकी जीत का अंतर नंदीग्राम की तुलना में कहीं अधिक बड़ा है और वहां ममता बनर्जी को हराना एक बहुत बड़ी प्रतीकात्मक जीत है। हालांकि, अंतिम निर्णय पूरी तरह से शुभेंदु अधिकारी और पार्टी आलाकमान के बीच होने वाली मंत्रणा पर निर्भर करेगा। बंगाल की सत्ता के शीर्ष पर बैठने से पहले अधिकारी का यह फैसला राज्य के आगामी राजनीतिक भविष्य की नींव रखेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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