बंगाल में सुवेंदु युग का उदय; जानें कांग्रेस से लेकर वेस्ट बंगाल CM बनने तक का सफर
शुवेंदु अधिकारी होंगे पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री! नंदीग्राम से भवानीपुर तक ममता को हराने वाले जननेता के सफर और संपत्ति की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

भगवा शॉल पहने शुवेंदु अधिकारी
Suvendu Adhikari West Bengal New CM 2026 : पश्चिम बंगाल की राजनीति ने आज एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ लिया है जिसकी गूँज दिल्ली के गलियारों तक सुनाई दे रही है। साल 2021 में नंदीग्राम और फिर 2026 के चुनावी रण में भवानीपुर की ज़मीन पर ममता बनर्जी को मात देने वाले शुभेंदु अधिकारी अब प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में बंगाल की तकदीर लिखेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में उन्हें भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया, जो न केवल बंगाल में भाजपा के बढ़ते प्रभुत्व का प्रमाण है बल्कि राज्य में दशकों से चली आ रही पारंपरिक राजनीति के अंत का संकेत भी है। एक आंदोलनकारी से लेकर राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुँचने वाले शुभेंदु अधिकारी का यह सफर संघर्ष, साहस और रणनीतिक कौशल की एक अनूठी दास्तां है।
शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक उत्कर्ष की जड़ें साल 2007-08 के उस नंदीग्राम आंदोलन में छिपी हैं, जिसने बंगाल की सत्ता से 34 साल पुराने वामपंथी शासन को उखाड़ फेंका था। इंडोनेशिया के सलीम ग्रुप के SEZ प्रोजेक्ट के खिलाफ जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में जब 'भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति' बनी, तो शुभेंदु उसके सबसे प्रखर चेहरे बनकर उभरे। 14 मार्च 2007 की वह तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज है जब पुलिस फायरिंग में 14 बेगुनाह मारे गए और इस लहूलुहान आंदोलन ने ममता बनर्जी के साथ शुभेंदु अधिकारी को बंगाल की जन-जन की आवाज़ बना दिया। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था; जिस टीएमसी को उन्होंने सींचा, उसी का साथ छोड़कर वे दिसंबर 2020 में भाजपा के खेमे में शामिल हो गए और अंततः अपनी पूर्व राजनीतिक गुरु को उनके ही गढ़ में परास्त कर दिया।
शुभेंदु अधिकारी का व्यक्तित्व जितना राजनीतिक है, उतना ही सामाजिक और पारिवारिक रूप से प्रभावशाली भी। एक कद्दावर राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले शुभेंदु के पिता शिशिर अधिकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं, जबकि उनके भाई दिव्येंदु और सौमेंदु भी सक्रिय राजनीति का हिस्सा हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि समाज और राजनीति के प्रति अपने अटूट समर्पण के चलते उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया। उनकी शैक्षणिक यात्रा भी उतनी ही सुदृढ़ है; कोंताई हाई स्कूल से शुरू होकर विद्यासागर यूनिवर्सिटी और रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी से एमए की डिग्री तक, उनके पास बौद्धिक और ज़मीनी अनुभव का सटीक संतुलन है।
आर्थिक पारदर्शिता की बात करें तो 2026 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास कुल 85.87 लाख रुपए की संपत्ति है, जिसमें पुश्तैनी ज़मीन और बैंक बचत शामिल है। बिना किसी कर्ज के बोझ वाले इस नेता पर अब बंगाल के करोड़ों लोगों की उम्मीदों का भार है। अमित शाह द्वारा उनकी ताजपोशी का ऐलान केवल एक पद का हस्तांतरण नहीं, बल्कि बंगाल की प्रशासनिक कार्यशैली में एक बड़े बदलाव की शुरुआत है। आने वाला समय बताएगा कि मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी उस 'सोनार बांग्ला' के सपने को कैसे हकीकत में बदलते हैं, जिसका वादा लेकर भाजपा सत्ता की दहलीज पार कर चुकी है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
