सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या के मामलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि छात्रों की मानसिक समस्याओं से निपटने के लिए जारी उसके निर्देशों को लागू करने में अब तक क्या प्रगति हुई है। कोर्ट ने कहा कि सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश आठ हफ्तों के भीतर इसकी पूरी जानकारी दें।


यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई के फैसले से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आदेश दिया था कि वे निजी कोचिंग संस्थानों के लिए नियम तय करें। इन नियमों में संस्थानों का अनिवार्य पंजीकरण, छात्रों की सुरक्षा के मानक और शिकायत निवारण प्रणाली शामिल हों। अदालत ने उस समय यह टिप्पणी की थी कि देश में बढ़ती छात्र आत्महत्याएँ एक गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही हैं, जिन पर तत्काल नियंत्रण जरूरी है।


न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार को भी इसी अवधि में अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि केंद्र को यह बताना होगा कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा और आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए किन-किन कदमों पर अब तक अमल हुआ है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कागज़ी योजनाएँ नहीं, बल्कि ठोस कार्यवाही दिखनी चाहिए।


कोर्ट ने यह भी कहा था कि कोचिंग सेंटर और शैक्षणिक संस्थानों को ऐसा माहौल बनाना होगा जहाँ छात्र मानसिक दबाव या डर की वजह से आत्मघाती कदम न उठाएँ। न्यायपीठ ने सरकारों को निर्देश दिया था कि दो महीने के भीतर सभी ज़रूरी नियम अधिसूचित कर दिए जाएँ ताकि कोई भी संस्था बिना पंजीकरण के न चल सके।


सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी नोट किया कि केंद्र सरकार ने बीते कुछ वर्षों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई योजनाएँ शुरू की हैं। शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2023 में स्कूलों के लिए 'उम्मीद' नामक दिशानिर्देश जारी किए थे, जिनका उद्देश्य बच्चों में सकारात्मक सोच और भावनात्मक स्थिरता को बढ़ावा देना है। वहीं कोविड-19 महामारी के दौरान छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर को देखते हुए ‘मनोदर्पण’ कार्यक्रम शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत बच्चों और अभिभावकों को ऑनलाइन परामर्श और सहयोग दिया गया।

अब सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले में ढिलाई नहीं बरतेगा। अदालत ने कहा कि छात्रों की जान बचाना सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इसके लिए ज़रूरी है कि हर स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ठोस व्यवस्था बनाई जाए। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा केवल अंकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें बच्चों के भावनात्मक कल्याण का भी ध्यान रखना ज़रूरी है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story