ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका ; क्या 10% नए टैक्स के चलते निर्यातकों के लिए आने वाला है बड़ा संकट?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ आदेश को अवैध ठहराया, लेकिन इसके तुरंत बाद 10% नया वैश्विक शुल्क लागू कर दिया गया। भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों पर इसका क्या असर पड़ेगा और भारतीय निर्यातकों के लिए आगे क्या चुनौतियां होंगी, जानिए विस्तृत रिपोर्ट।

पीएम नरेंद्र मोदी और प्रेजिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प
वॉशिंगटन से आई एक ऐतिहासिक कानूनी हलचल ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को झकझोर दिया है। 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को अवैध करार दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रंप ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत अपनी शक्तियों का अतिक्रमण किया था। इस निर्णय ने उन तथाकथित “रिसिप्रोकल टैरिफ” की कानूनी नींव ही खत्म कर दी, जिनका असर भारत सहित कई देशों के आयात पर पड़ रहा था।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अरबों डॉलर के टैरिफ राजस्व की वापसी का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। साथ ही, यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति की व्यापार संबंधी आपात शक्तियों पर भी स्पष्ट सीमाएं तय करता है। यह मामला केवल व्यापार नीति का नहीं, बल्कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के संतुलन का भी प्रतीक बन गया है।
ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया और नया कदम:
फैसले के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “गहरा निराशाजनक” बताते हुए न्यायाधीशों की आलोचना की। हालांकि, उन्होंने पीछे हटने के संकेत नहीं दिए। इसके बजाय, उन्होंने 1974 के Trade Act की धारा 122 के तहत एक नया कार्यकारी आदेश जारी कर दिया, जिसके माध्यम से सभी आयातित वस्तुओं पर 10% का वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा की गई। यह नया शुल्क भारत सहित सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर लागू होगा।
भारत–अमेरिका व्यापार समीकरण:
फैसले के बाद जारी अपने बयान में ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका–भारत व्यापार संबंधों में “कुछ नहीं बदला है।” उन्होंने दावा किया कि अंतरिम व्यापार व्यवस्था के तहत भारत पर टैरिफ लागू रहेंगे, जबकि अमेरिका को समान शुल्क का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसे उन्होंने “निष्पक्ष समझौता” बताया। ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए उन्हें “महान सज्जन” कहा और यह भी जोड़ा कि टैरिफ के मुद्दे से परे दोनों देशों के संबंध मजबूत और सकारात्मक हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले भारत पर लगाए गए पारस्परिक टैरिफ लगभग 18% तक पहुंच गए थे, जिन्हें बाद में एक अंतरिम ढांचे के तहत कम किया गया। अब नए 10% वैश्विक टैरिफ के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को कुछ राहत तो मिल सकती है, लेकिन यह शुल्क फिर भी लागत बढ़ाने वाला है। विशेष रूप से वस्त्र, ऑटो कंपोनेंट्स, स्टील, फार्मास्यूटिकल्स और टेक्नोलॉजी उत्पादों जैसे क्षेत्रों में निर्यात प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। हालांकि, यह दर पहले की तुलना में कम है, फिर भी यह स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था अस्थायी होगी या दीर्घकालिक।
विश्लेषकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला व्यापारिक तनाव को समाप्त नहीं करता, बल्कि कानूनी और नीतिगत अनिश्चितता को और बढ़ा देता है। वैश्विक बाजार अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि टैरिफ राजस्व की वापसी कैसे होगी, नया कानूनी ढांचा कितने समय तक प्रभावी रहेगा और क्या भविष्य में अमेरिका की व्यापार नीति में और बदलाव होंगे।
मुख्य बिंदु:
- सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की टैरिफ लगाने की आपात शक्तियों को सीमित किया।
- पूर्व में लगाए गए व्यापक टैरिफ की कानूनी वैधता समाप्त हुई।
- 10% का नया वैश्विक टैरिफ लागू किया गया, जिसमें भारत भी शामिल है।
- भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर आधिकारिक रूप से “यथास्थिति” का दावा।
अंततः यह घटनाक्रम केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन के भविष्य का संकेत है। अमेरिका और भारत के बीच आर्थिक संबंध मजबूत अवश्य हैं, लेकिन बदलती नीतियों और न्यायिक हस्तक्षेपों के बीच यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में व्यापारिक समीकरण नए रूप ले सकते हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
