श्रीनगर एयरपोर्ट पर पकड़े गए 2 विदेशी यात्री ; पूछताछ के बाद छोड़ा गया, जानें पूरा मामला
श्रीनगर एयरपोर्ट पर दो अमेरिकी नागरिकों को सैटेलाइट डिवाइस के साथ पकड़ा गया। जांच में गार्मिन सैटेलाइट कम्युनिकेटर और जीपीएस बरामद हुए। जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित इन उपकरणों को लेकर पूछताछ के बाद यात्रियों को रिहा किया गया, जिससे सुरक्षा नियमों की सख्ती फिर सामने आई।

श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा
श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उस समय सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई, जब नियमित जांच के दौरान दो अमेरिकी नागरिकों के सामान से प्रतिबंधित सैटेलाइट डिवाइस बरामद हुए। यह मामला न केवल सुरक्षा दृष्टि से संवेदनशील था, बल्कि जम्मू-कश्मीर जैसे रणनीतिक क्षेत्र में ऐसे उपकरणों की मौजूदगी ने अधिकारियों को तुरंत सतर्क कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, पकड़े गए व्यक्तियों में एक की पहचान जेफ्री स्कॉट प्रैथर के रूप में हुई है, जो अपने साथी हालदार कौशिक के साथ यात्रा कर रहे थे। कौशिक भारतीय मूल के नैचुरलाइज़्ड अमेरिकी नागरिक हैं और अमेरिकी सरकार के साथ काम कर चुके हैं। दोनों यात्री दिल्ली के रास्ते कश्मीर पहुंचे थे और उन्हें श्रीनगर से नई दिल्ली होते हुए काठमांडू जाना था। बताया जाता है कि प्रैथर रविवार को एयर इंडिया की फ्लाइट से श्रीनगर से दिल्ली के लिए रवाना होने वाले थे, लेकिन सुरक्षा जांच के दौरान उनके बैग में संदिग्ध उपकरण मिलने पर उन्हें रोक लिया गया।
जांच के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने प्रैथर के सामान से एक गार्मिन सैटेलाइट कम्युनिकेटर और एक गार्मिन जीपीएस डिवाइस बरामद किया, जो ताइवान में निर्मित था। ये उपकरण इरिडियम सैटेलाइट नेटवर्क के माध्यम से काम करते हैं, जो दुनिया के सबसे दूरदराज़ और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी संचार की सुविधा प्रदान करता है। ऐसे उपकरण सामान्य मोबाइल नेटवर्क को बायपास कर सीधे सैटेलाइट से जुड़ते हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचना संभव हो सकता है।
भारत में सैटेलाइट फोन और ऐसे संचार उपकरणों के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध हैं। विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बिना अनुमति इनका इस्तेमाल पूरी तरह निषिद्ध है। दूरसंचार विभाग से पूर्व अनुमति के बिना इन उपकरणों का रखना या उपयोग करना भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है, जिसमें गिरफ्तारी, जुर्माना और उपकरणों की जब्ती जैसी कार्रवाई हो सकती है।
प्रारंभिक पूछताछ के बाद दोनों यात्रियों को जम्मू-कश्मीर पुलिस के हवाले कर दिया गया, जहां उनसे विस्तृत जांच की गई। हालांकि, बाद में अधिकारियों ने पाया कि प्रैथर इन उपकरणों को केवल ट्रेकिंग और नेविगेशन के उद्देश्य से अमेरिका से अपने साथ लाए थे और उन्हें भारत में लागू प्रतिबंधों की जानकारी नहीं थी। सत्यापन के बाद उन्हें जाने की अनुमति दे दी गई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कितना गंभीर माना जाता है।
यह घटना न केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत में सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना कितना आवश्यक है। विशेषकर जम्मू-कश्मीर जैसे इलाकों में किसी भी प्रकार की तकनीकी चूक बड़े सुरक्षा खतरे का कारण बन सकती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
