Shiv Sena UBT MP split rumors 2026 : महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़े भूचाल के संकेत मिल रहे हैं, जहां प्रमुख विपक्षी दल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर एक नई टूट की अटकलों ने सियासी गलियारे को गर्मा दिया है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चाएं जोरों पर हैं कि उद्धव गुट के कई सांसद पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। इस संभावित बगावत और डैमेज कंट्रोल को साधने के लिए पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार, 14 जून को मातोश्री पर अपने नौ सांसदों की एक आपात और महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक में उद्धव ठाकरे ने भविष्य की राजनीति और पार्टी में निष्ठा को लेकर अपना रुख बेहद कड़े और दो टूक शब्दों में साफ कर दिया है।

बैठक के भीतर की कूटनीतिक और भावुक रणनीति को साझा करते हुए उद्धव ठाकरे ने पार्टी में जारी उथल-पुथल पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने अपने सांसदों के सामने सीधे तौर पर रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि जिन्हें पार्टी छोड़कर जाना है, वे खुशी-खुशी जा सकते हैं। अपने नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा कि भले ही आज का दिन उनका न हो, लेकिन आने वाला कल निश्चित रूप से उनका होगा और तब तक सभी को धैर्य रखकर इस कठिन दौर का सामना करना होगा। ठाकरे का यह बयान साफ तौर पर दर्शाता है कि वे अब किसी भी नेता को दबाव में या जबरदस्ती रोकने के मूड में नहीं हैं।

पार्टी के इतिहास और पुरानी बगावत को याद करते हुए उद्धव ठाकरे ने आगाह किया कि जो लोग बालासाहेब ठाकरे की मूल विचारधारा और शिवसेना को छोड़कर गए हैं, उन्हें एक दिन अपने इस फैसले पर भारी पछतावा होगा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। उन्होंने चार साल पहले हुए महा-विद्रोह का जिक्र करते हुए कहा कि जब 40 विधायक उनसे अलग हुए थे, तब वे राज्य के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने नेताओं से सवालिया लहजे में पूछा कि क्या लोगों को सच में ऐसा लगा कि जो बगावत सबको दिखाई दे रही थी, उसकी भनक उन्हें नहीं थी। ठाकरे ने स्पष्ट किया कि उन्हें सब पता था, लेकिन उन्होंने किसी पर कोई दबाव नहीं बनाया और न ही किसी के कथित घोटालों की फाइलें खुलवाईं।

इस कड़े संदेश के साथ उद्धव ठाकरे ने साफ कर दिया है कि अगर किसी ने मन बदल लिया है और जाने की तैयारी कर ली है, तो उसे रोकने की कोशिशें बेमानी हैं। उन्होंने कहा कि जो जाना चाहता है, वह पूरी तरह स्वतंत्र है और वे उसे भविष्य के लिए शुभकामनाएं ही देंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव ठाकरे का यह आक्रामक और बेबाक रुख पार्टी के भीतर वफादारों और बागियों को अलग करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम के दूरगामी परिणाम होने तय हैं, क्योंकि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अगर यह टूट सच साबित होती है, तो यह उद्धव गुट के अस्तित्व के लिए एक और कड़ी परीक्षा होगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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