संवाद खत्म हुआ तो तानाशाही का पतन तय, ‘सामना’ में शिवसेना (UBT) का केंद्र पर हमला
शिवसेना (UBT) ने ‘सामना’ संपादकीय में केंद्र सरकार पर युवाओं से संवाद नहीं करने और पुलिस कार्रवाई का सहारा लेने का आरोप लगाया। NEET-UG पेपर लीक विरोध, लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक स्थिति पर पार्टी ने सवाल उठाए।

तस्वीर में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे नजर आ रहे
शिवसेना (UBT) ने बुधवार को भाजपा नीत केंद्र सरकार पर नया हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार प्रदर्शन कर रहे युवाओं से संवाद करने में विफल रही है और जनता के असंतोष से निपटने के लिए पुलिस कार्रवाई का सहारा ले रही है। पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में कहा कि प्रदर्शनकारियों से बातचीत नहीं करना सरकार और नागरिकों के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है।
यह संपादकीय दिल्ली में हुए प्रदर्शनों और इस सप्ताह की शुरुआत में नई दिल्ली में आयोजित “संसद चलो” मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में आया है। ये प्रदर्शन कथित NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर जारी हैं।
‘सामना’ ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए इसे अत्यधिक बताया। संपादकीय में दावा किया गया कि बल प्रयोग के बावजूद प्रदर्शनकारी अपने आंदोलन पर डटे रहे।
संपादकीय में कहा गया, “दिल्ली की सड़कों पर पुलिस युवाओं पर लाठीचार्ज कर रही थी, जबकि गुस्साए युवा चुपचाप खड़े होकर वार सह रहे थे। जब ऐसे प्रदर्शनकारी पैदा होते हैं जो कहते हैं, ‘मुझे और मारो, लेकिन मैं यहां से नहीं हटूंगा’, तो तानाशाह उनका क्या बिगाड़ सकते हैं? सोमवार को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की तानाशाही दिल्ली की सड़कों पर दिखाई दी। भारत की बुद्ध की भूमि पर सरकार की हिंसा मानवता का मजाक साबित हुई। मोदी खुद को विश्वगुरु कहते हैं। अंधभक्त उन्हें विष्णु का 13वां अवतार मानते हैं। हालांकि, दिल्ली की सड़कों पर वे निर्दोष युवाओं के सिर फोड़ने वाला राक्षसी शासन चला रहे हैं। अगर सत्ता में बैठे लोग संवाद शुरू नहीं करते हैं, तो लगता है कि उनका शासन लंबे समय तक नहीं चलेगा।”
शिवसेना (UBT) ने आरोप लगाया कि सरकार के इस रवैये से समस्या का समाधान होने के बजाय जनता में नाराजगी बढ़ रही है।
संपादकीय में दावा किया गया कि केंद्र सरकार लगातार प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और अपनी चिंताएं उठाने वाले नागरिकों से संवाद करने से बचती रही है। इसमें यह भी सवाल उठाया गया कि कथित NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया।
‘सामना’ में लिखा गया, “वास्तव में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना आसान था, लेकिन पीएम मोदी यह इस्तीफा नहीं लेते। क्योंकि इसके बाद मंत्रिमंडल में इस्तीफों की कतार लग जाएगी। कम से कम भ्रष्टाचार, लूट और अक्षमता जैसे अवगुणों की मूर्तियां बने एक दर्जन मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ेगा। हर बार जनता सड़कों पर आएगी और भ्रष्ट अधिकारियों के इस्तीफे की मांग को लेकर मोदी के दरवाजे पर दस्तक देगी।”
संपादकीय में किए गए ये दावे शिवसेना (UBT) की राजनीतिक स्थिति को दर्शाते हैं। केंद्र सरकार ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
‘सामना’ के संपादकीय में देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आंदोलनों का भी उल्लेख किया गया। इसमें पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, भूमि अधिग्रहण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र किया गया।
संपादकीय में ऋषिकेश में पेड़ों की कटाई, झारखंड और छत्तीसगढ़ में वन मंजूरी से जुड़े विरोधों के अलावा महाराष्ट्र के नासिक, अकोला, सोलापुर, भंडारा और बुलढाणा जिलों में किसानों के आंदोलनों का भी उल्लेख किया गया। पार्टी ने दावा किया कि ये प्रदर्शन सरकार की नीतियों को लेकर व्यापक जन असंतोष को दिखाते हैं।
शिवसेना (UBT) ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर भी चिंता जताई। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है और संवैधानिक निकायों के कामकाज की आलोचना की।
संपादकीय में महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें राज्य विधानमंडल में मान्यता प्राप्त नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति और विधानसभा की कार्यवाही को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना शामिल है। ये आरोप पार्टी की ओर से लगाए गए हैं और संपादकीय में भाजपा या महाराष्ट्र सरकार की ओर से इन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
‘सामना’ के संपादकीय ने लीबिया, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में हुए छात्र और युवा आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार और नागरिकों के बीच संवाद की कमी से राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है।
संपादकीय में कहा गया, “राजनीति में संवाद महत्वपूर्ण है। हालांकि, मोदी सरकार और जनता के बीच संवाद समाप्त हो गया है। भाजपा के लिए मतदाता खरीदने योग्य वस्तु बन गया है। 12 वर्षों तक इस वस्तु को खरीदकर चुनाव जीतने के फॉर्मूले पर शासन करने वाले मोदी का अहंकार युवाओं के गुस्से से धूल में मिल गया है।”
संपादकीय के अंत में शिवसेना (UBT) ने दावा किया कि जब सरकारें जनता की समस्याओं पर प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं तो वे कमजोर हो जाती हैं और आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाएं तेजी से सत्तारूढ़ व्यवस्था के प्रभाव में आ रही हैं।

Pratahkal Newsroom
प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
