नई दिल्ली। संसद में प्रस्तावित VB–G RAM G बिल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस विधेयक के परिचय का कड़ा विरोध करते हुए इसे देश के सबसे कमजोर वर्गों के कल्याण के प्रति एक प्रतिगामी कदम बताया। सदन में अपने वक्तव्य के दौरान थरूर ने कहा कि इस बिल में महात्मा गांधी के नाम को हटाना मात्र एक प्रशासनिक परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह उस योजना की मूल भावना और दार्शनिक आधार पर सीधा प्रहार है, जो दशकों से ग्रामीण भारत की रीढ़ रही है।

थरूर ने महात्मा गांधी के ‘राम राज्य’ के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कोई राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि ग्राम सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और समावेशी आर्थिक विकास का एक समग्र मॉडल था। उनके अनुसार, प्रस्तावित बदलाव इस ऐतिहासिक सोच को कमजोर करता है और कार्यक्रम की पहचान व उद्देश्य दोनों को प्रभावित करता है।

वित्तीय संरचना पर चिंता जताते हुए सांसद ने कहा कि बिल के तहत राज्य सरकारों पर 40 प्रतिशत वित्तीय भार डालना विशेष रूप से गरीब और संसाधन-विहीन राज्यों के लिए योजना को अव्यावहारिक बना देगा। इससे मजदूरी भुगतान में देरी, कार्यदिवसों में कटौती और अंततः योजना के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की व्यवस्था से जमीनी स्तर पर लाभार्थियों पर सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा।

इसके साथ ही थरूर ने बिल में योजना को कार्यकारी अधिसूचना के अधीन करने के प्रावधान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इससे योजना का नियंत्रण सीधे Union के हाथों में चला जाएगा, जो इसके मूल उद्देश्य और संघीय ढांचे के सिद्धांतों के विपरीत है। थरूर के अनुसार, इस तरह का कदम न केवल राज्यों की भूमिका को सीमित करता है, बल्कि इसे लागू करने के लिए आवश्यक विधायी आधार भी कमजोर पड़ता है।

संसद में उठी यह आपत्तियां केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण विकास, संघीय संतुलन और महात्मा गांधी की विचारधारा से जुड़े व्यापक सवालों को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में VB–G RAM G बिल पर होने वाली बहस यह तय करेगी कि देश की ग्राम-आधारित कल्याणकारी योजनाओं की दिशा और स्वरूप किस ओर बढ़ता है।

Pratahkal Newsroom

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