आखिर कौन है सुप्रीम कोर्ट की नई जज वी मोहना ? जिनकी नियुक्ति को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरी
वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना बार से सीधे देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीश नियुक्त होने वाली दूसरी महिला बनीं, पांच साल बाद सुप्रीम कोर्ट को मिली महिला जज।

नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पोडियम पर लगे माइक से संबोधित करती हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की फाइल तस्वीर
Senior Advocate V Mohana appointed as Supreme Court Judge : देश की सर्वोच्च अदालत के इतिहास में आज एक नया और अभूर्तपूर्व अध्याय जुड़ गया है जब पांच साल के लंबे इंतजार के बाद किसी महिला न्यायाधीश की नियुक्ति को अंतिम मंजूरी मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिता सुब्रमणि मोहना को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव पर आधिकारिक मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार की हरी झंडी मिलने के ठीक अगले दिन राष्ट्रपति द्वारा यह अंतिम स्वीकृति दी गई। जस्टिस वी. मोहना देश के न्यायिक इतिहास में बार यानी वकालत से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली दूसरी महिला बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रही हैं। इस नियुक्ति ने न केवल शीर्ष अदालत में महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत किया है, बल्कि कानूनी गलियारों में एक नई चर्चा को भी जन्म दे दिया है।
चेन्नई से देश की राजधानी तक और वकालत की बुनियादी नींव :
न्यायमूर्ति वी. मोहना का जन्म 27 जून 1966 को चेन्नई में हुआ था और वे अपने परिवार में पहली पीढ़ी की वकील हैं। उन्होंने साल 1988 में कोयंबटूर विधि महाविद्यालय से भारत के पहले बैच के पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम के तहत स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। विधि स्नातक होने के बाद वी. मोहना ने कोयंबटूर के प्रसिद्ध सिविल वकील एम. पंजाबागेसन के अधीन अपना प्रारंभिक कानूनी प्रशिक्षण लिया। यहीं पर उन्होंने मुकदमों के सटीक नोट्स बनाना, अदालती दलीलों की योजना तैयार करना और न्यायिक कार्यवाहियों को बेहद करीब से देखना जैसी वकालत की बुनियादी बातें सीखीं, जिसने आगे चलकर उनके शानदार कानूनी करियर की मजबूत नींव रखी। पुरुष प्रधान अदालतों के उस पुराने दौर में भी अपनी प्रतिभा के दम पर वी. मोहना ने कानूनी हलकों में काफी चर्चा बटोरी थी। इसके बाद साल 1992 में अपने करियर को नए क्षितिज पर ले जाने के उद्देश्य से उन्होंने देश की राजधानी नई दिल्ली का रुख करने का एक बड़ा और साहसिक फैसला लिया।
देश के महानतम कानूनी दिग्गजों के साथ काम करने का अनुभव :
दिल्ली आने के बाद वी. मोहना का कानूनी सफर एक नए और बेहद प्रभावशाली दौर में प्रवेश कर गया। वे सुप्रीम कोर्ट की तत्कालीन अधिवक्ता और अपनी गुरु इंदु मल्होत्रा के कार्यालय में शामिल हुईं, जो बाद में खुद भी देश के न्यायिक इतिहास में बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली पहली महिला बनी थीं। इसके बाद उन्होंने देश के विख्यात वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन के चैंबर में अपनी सेवाएं दीं और कई अत्यंत महत्वपूर्ण मामलों का हिस्सा बनीं। अपने इस शानदार सफर के दौरान उन्होंने कपिल सिब्बल, के.के. वेणुगोपाल, पी. चिदंबरम, अरुण जेटली और टी. आर. अंध्यारुजिना सहित देश के कई सबसे प्रसिद्ध कानूनी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साथ मिलकर विभिन्न ऐतिहासिक मामलों में काम किया, जिससे उनकी कानूनी समझ और अधिक प्रखर होती चली गई।
एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड से वरिष्ठ अधिवक्ता बनने तक की यात्रा :
साल 1996 में अपनी असाधारण कानूनी प्रतिभा की बदौलत वी. मोहना ने बेहद कठिन मानी जाने वाली 'एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड' परीक्षा उत्तीर्ण की। इस सफलता के बाद उन्होंने भारत के सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में नियमित और प्रभावी ढंग से बहस करना शुरू कर दिया। उन्होंने लंबे समय तक संविधान, भ्रष्टाचार, मादक द्रव्य, आपराधिक कानून और सेवा कानून से जुड़े जटिल मामलों को संभालने वाली भारत सरकार की आधिकारिक वकील के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। सिविल और आपराधिक मामलों में एक निष्पक्ष सलाहकार के रूप में अदालतों में पेश होने के साथ-साथ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट कानूनी सेवा समिति में भी समाज के वंचित तबकों के लिए बेहतरीन कार्य किया। उनकी इसी प्रखर निष्ठा और बेहतरीन कानूनी समझ को देखते हुए साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण विशेष पीठ ने उन्हें 'वरिष्ठ अधिवक्ता' के रूप में नामित किया था।
नीतिगत मामलों में सशक्त पैरवी और सुप्रीम कोर्ट का नया समीकरण :
सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में उनकी पहचान देश के कई बड़े और दूरगामी नीतिगत फैसलों की पैरवी करने वाले वकील के तौर पर सुदृढ़ हुई। उन्होंने भारतीय सेना और सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन तथा समान सेवा शर्तें दिलाने के लिए एक लंबी और ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई लड़ी। इसके अतिरिक्त, वे साल 2022 के कर्नाटक हिजाब विवाद मामले में भी शीर्ष अदालत के समक्ष मजबूती से पेश हुईं और साल 2015 के ऐतिहासिक राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग मामले में भारत सरकार का कुशल प्रतिनिधित्व किया। वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति और उनके सामाजिक-कानूनी अधिकारों के संरक्षण के लिए भी उन्होंने अदालतों में मुखर होकर अपनी आवाज उठाई।
जस्टिस वी. मोहना की 2 जून 2026 को हुई इस नियुक्ति के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में पिछले कई महीनों से जारी महिला जजों का सूखा पूरी तरह समाप्त हो गया है। लंबे समय से जस्टिस बी. वी. नागरत्ना सर्वोच्च अदालत की इकलौती महिला जज के रूप में कार्यरत थीं, जो साल 2027 में देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने वाली हैं। अब जस्टिस मोहना के पदभार ग्रहण करने से सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या बढ़कर दो हो गई है। वर्तमान में सर्वोच्च अदालत में केवल दो अन्य न्यायाधीश—जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन ही ऐसे हैं, जिन्हें बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया था। साल 1989 में देश की पहली महिला जज के रूप में जस्टिस एम. फातिमा बीवी की नियुक्ति से लेकर अब तक के इतिहास में वी. मोहना 12वीं महिला न्यायाधीश हैं। 59 वर्षीय जस्टिस मोहना का यह कार्यकाल जून 2031 तक रहेगा।
समावेशी न्यायपालिका और व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव :
कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों के तहत कार्यपालिका और न्यायपालिका के इस त्वरित तालमेल से हुई यह नियुक्ति देश की न्याय वितरण प्रणाली को और अधिक समावेशी तथा सुदृढ़ बनाएगी। एक समय ऐसा भी था जब जस्टिस इंदु मल्होत्रा, जस्टिस आर. भानुमति और जस्टिस इंदिरा बनर्जी के कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एक साथ तीन महिला जज कार्यरत थीं। आज जस्टिस मोहना की यह ऐतिहासिक नियुक्ति न केवल सर्वोच्च न्यायपालिका में महिलाओं की न्यायसंगत भागीदारी को बल देती है, बल्कि यह कड़ा संदेश भी देती है कि बार में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वकीलों के लिए बेंच के रास्ते हमेशा खुले हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित पांच नामों में शामिल जस्टिस मोहना की इस महत्वपूर्ण नियुक्ति से आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता और लंबे समय से लंबित पड़े नीतिगत मुकदमों के निपटारे की गति में भारी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
