भारत और विश्व कला जगत ने एक महान मूर्तिकार को खो दिया है। देश के प्रतिष्ठित शिल्पकार, श्री राम सुतार का 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी कलात्मक प्रतिभा और अद्वितीय शिल्पकला ने भारत को न केवल विश्व में पहचान दिलाई, बल्कि देश की गौरवशाली संस्कृति और इतिहास को स्थायी रूप से अमर कर दिया। श्री सुतार की सबसे प्रसिद्ध कृति, Statue of Unity, जो कि भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में बनी है, आज भी विश्व के सबसे ऊंचे प्रतिमाओं में गिनी जाती है और भारतीय अभिमान का प्रतीक बनी हुई है।

प्रधानमंत्री ने इस दुखद घटना पर अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि श्री राम सुतार एक असाधारण कलाकार थे, जिनकी कलाकृतियाँ भारतीय इतिहास, संस्कृति और सामूहिक भावना की सशक्त अभिव्यक्ति हैं। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, “श्री राम सुतार जी के निधन से गहरा दुख हुआ। उनकी कलाकृतियाँ हमेशा राष्ट्रीय गर्व और प्रेरणा का स्रोत रहेंगी। ओम शांति।”



केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री, श्री अमित शाह ने भी श्री सुतार के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने उन्हें Statue of Unity के निर्माता के रूप में याद करते हुए कहा कि उनकी कृतियाँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगी।

श्री राम सुतार का जन्म भारत में हुआ और उन्होंने अपने जीवन को कला के विकास और मूर्तिकला के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए समर्पित किया। उनके करियर में अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाएँ शामिल रहीं, जिनमें भारत के विविध ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और सांस्कृतिक प्रतीकों की शिल्पकृतियाँ प्रमुख हैं। उनकी कलाकृतियाँ न केवल तकनीकी कौशल का प्रमाण हैं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की जीवंत व्याख्या भी प्रस्तुत करती हैं।

विशेष रूप से Statue of Unity के निर्माण में उनकी कला और नेतृत्व ने इस परियोजना को वैश्विक मान्यता दिलाई। यह प्रतिमा सिर्फ शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण नहीं, बल्कि भारतीय एकता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी है। श्री सुतार की मृत्यु के साथ ही कला जगत एक युग की प्रतिभा को खो गया है। उनकी शिल्पकला और अद्भुत दृष्टि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनके द्वारा निर्मित प्रत्येक शिल्प कार्य भारतीय इतिहास और संस्कृति की जीवंत गाथा कहता है। कला और सांस्कृतिक धरोहर के क्षेत्र में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

श्री राम सुतार की विरासत सिर्फ उनकी मूर्तियों तक सीमित नहीं है; उन्होंने देश को एक पहचान दी, कलाकारों को प्रेरित किया और कला प्रेमियों के लिए आदर्श प्रस्तुत किया। उनका निधन भारत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी कृतियाँ हमेशा जीवित रहेंगी, और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ बनी रहेंगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story